शारदीय नवरात्रः आज बन रहा तृतीय और चतुर्थी का शुभ संयोग, मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा के रूप में होगी देवी की आराधना

शारदीय नवरात्रः आज बन रहा तृतीय और चतुर्थी का शुभ संयोग, मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा के रूप में होगी देवी की आराधना

N4N DESK: शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। इस वर्ष तृतीया और चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही है। चतुर्थी तिथि का लोप होने की वजह से इस साल 8 दिनों का ही नवरात्र मनाया जा रहा है। 9 अकटूबर को सुबह 7 बजकर 38 मिनट तक तृतीया तिथि है उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। 

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मां चंद्रघंटा देवी पार्वती का विवाहित रूप है। भगवान शिव के साथ विवाह के बाद देवी महागौरी ने मस्तक पर अर्द्धचंद्र धारण किया था, इसलिए उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। चंद्रघंटा को शांतिदायक और कल्याणकारी माना जाता है। माता चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण के समान उज्ज्वल है और इनके दस हाथ हैं। वहीं मां कूष्मांडा देवी के बारे में मान्यता है कि जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय चारों तरफ अंधकार था। तब देवी के इस स्वरूप ने ब्रह्मांड की रचना की। देवी कूष्मांडा की अष्टभुजा हैं, इसलिए इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। ये भक्तों के कष्ट रोग, शोक संतापों का नाश करती हैं। 

एक साथ नवरात्र की दो तिथियां पड़ने से भक्त एक तरफ जहां खुश हैं, वहीं नवरात्र के दिन कम हो जाने से थोड़ी-सी मायूसी भी है। हालांकि नवरात्र है, तो उत्साह है, भक्ति है, उल्लास है, और देश के ज्यादातर राज्यों में इस वक्त भक्त देवी की आराधना में डूबे हुए हैं। देशभर के 51 शक्तिपीठ सहित सिद्धपीठों में लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा है। 

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