एक रुपये का सिक्का बना जी का जंजाल: जमा किया था बुरे दिन में काम आएगा, अब न तो दुकान ले रहा है न ही स्कूल, बैंक भी बना रहा है बहाना

 एक रुपये का सिक्का बना जी का जंजाल: जमा किया था बुरे दिन में काम आएगा, अब न तो दुकान ले रहा है न ही स्कूल, बैंक भी बना रहा है बहाना

कुशीनगर. छोटी सी परचून की दुकान चलाने वाले मोतीलाल गुप्ता ने काफी समय से एक रुपये का छोटा सिक्का जमा कर परेशानी के समय काम आने का मंसूबा पाल रखा था. अब यही सिक्का जी के जंजाल बन गया है. सिक्के को न स्कूल वाले फीस के एवज में ले रहे हैं और न ही कोई दुकानदार ले रहे हैं. बैंक वाले तरह-तरह का बहाना बनाकर जमा करने से परहेज कर रहे हैं.

कुशीनगर जनपद के खडडा थाना  क्षेत्र के लखुआ लखुइ गांव निवासी मोतीलाल गुप्ता ने बताया कि घर पर एक छोटी सी परचून की दुकान है. गांव के लोग सामान खरीदने आते हैं तो छोटा सिक्का भी देते हैं. इन सिक्को को गुल्लक में रखकर जमा करना शुरू किया. अचानक पैसे की दिक्कत आयी तो गुल्लक से सिक्का निकाला जो लगभग 12 हजार हुआ. मन ही मन खुश मोतीलाल सिक्को को लेकर  स्कूल का फीस जमा करने गये तो स्कूल वाले ने यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया कि यह सिक्का नहीं चल रहा है.

इसी तरह कांपी किताब, कपड़ा, जूता के दुकानों पर भी सिक्का लेने को कोई तैयार नहीं हुआ तो परेशान होकर बैंकों में जमा करने गया, तो बैंक प्रबंधक पहले तो तमाम सवाल जवाब किया. इसके बाद तमाम नियम कानून बताते हुए बाद में आने को कह सिक्का लेने से हाथ खींच लिया. सरकार द्वारा जारी  सिक्के की दुर्दशा देख मोतीलाल हतप्रभ हो गये हैं.

उनके समझ में नहीं आ रहा है कि खुद सरकार द्वारा चलाए गये सिक्के आखिर कोई ले क्यों नहीं रहा है. यह कहानी केवल मोतीलाल का नहीं है, यह हाल लगभग पूरे जनपद का है. पिछले काफी समय से एक रुपये के छोटे सिक्के का चलन रूक सा गया है.

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