सात दिवसीय श्री-श्री 1008 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का हुआ समापन

सात दिवसीय श्री-श्री 1008 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का हुआ समापन

पूर्णिया: मुख्यालय के ई होम्स पनोरमा बाय-पास रोड एन-एच-31 में आयोजित सात दिवसीय श्री-श्री 1008 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के अंतिम दिन शुक्रवार को कथा वाचक भाई गुप्तेश्वर महाराज ने कथा के दौरान राधा-कृष्ण के जीवन पर आधारित प्रेम कथा को सुनाया।

इस दौरान यज्ञ के समापन से पहले रूकमणी विवाह के साथ-साथ गो माता व उनका बछड़ा का पूजन आचार्य व विद्वानो के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ स्थल पर किया गया।कथा समापन के दौरान श्रद्धालुओ ने होलिकोत्सव मनाकर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली भी खेली। यज्ञ के साथ-साथ महाप्रसाद भंडारे के साथ शुक्रवार की संध्या को यज्ञ का समापन हो गया। यज्ञ समापन में शभारी संख्या में श्रद्धालुओ दूर-दूर से महायज्ञ में शामिल होने पहुंचे हुए थें .मौके पर महाप्रसाद वितरण में श्रद्धालुओ ने विभिन्न गांवो से पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।

समापन के समय पूर्णिया सहित कोशी-सींमाचल के विभिन्न जगहों से श्रद्धालुओ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।यज्ञ स्थल पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओ की भीड़ उमड़ी रही।इस दौरान सबसे पहले कथा वाचक व उनके सहयोगियों ने हवन किया।उसके बाद महयज्ञ में शामिल यजमानों ने हवन किया।

इसके उपरांत महायज्ञ में आयें सैकड़ो लोगों ने आहुति डालकर सुख,समृद्धि व विश्व  शांति की कांमना की महायज्ञ स्थल पर  कथाव्यास गुप्तेश्वर जी महाराज ने कहां की किसी भी महायज्ञ के होने से मानव में आयीं विकृतिया अपने आप दूर हो जाती हैं।श्री-श्री 1008 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के माध्यम से समाज में एकजुटता आती हैं।हवन करने से देवता प्रसन्न होकर मानव का कल्याण करते हैं।उन्होंने कहा की गुरू के नाम जपने मात्र से ही तमाम पापों का नाश हो जाता हैं।अगर भक्त सच्चे मन से अपने गुरू का पूजा करें तो उनका उद्धार हो जाता हैं।वही महायज्ञ में आयें महायज्ञ संयोजक हरिओम जी महाराज ने कहां की माया ही संसार की रचना करती हैं व व्यक्ति के श्रोत अर्थात ब्राह्म के प्रति अज्ञानी बना देती हैं।उन्होने कहां की जब मनुष्य जन्म लेता हैं तो वह अपने नाम रूप के कारण स्वंय को ईश्वर का अंश नही मानता हैं,बल्कि उसे अपने बाह्म रूप का अभिमान हो जाता हैं।वह अपना व्यक्तित्व रच लेता हैं।उसकी सोच सिमित रह जाती हैं।सत्य का ज्ञान हो जाने पर व्यक्तित्व का विनाश हो जाता हैं। तब व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।

उन्होंने कहां की श्रृष्टि के पूर्व,वर्तमान व भविष्य में केवल उन्हीं का अस्तित्व विद्यमान रहता हैं।ईश्वर सतरूप होते हुए भी सत्य से परे हैं।

कार्यक्रम के मौके पर पनोरमा ग्रुप के प्रबंध निदेशक संजीव मिश्रा उनकी धर्म पत्नी कविता मिश्रा, नीतीश यादव, दिलीप यादव, शंकर कुशवाहा, अजय झा, विशेष वर्मा, विनोद अग्रवाल, श्रीकांत प्रत्युश, नंदन झा, रितेश झा, अजय भगत, मनखुश मिश्रा, अनुराग कश्यप, मोनू यादव, मनोहर झा, अरूण झा, मुकुल, सुनील सुमन, अभिषेक मिश्रा, आनंद, चंदन, गौरव, सत्यम, सूरज, मनीष, दीपक दिलवर, पवन मिश्रा, सोनू साह समेत हजारों कार्यकर्ता मौजूद थें।


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