सीमांचल एक्सप्रेस हादसा : दर्द के बीच दिखी इंसानियत, फरिश्ते बनकर आये सहदेई बुजुर्ग के लोग

HAJIPUR : सीमांचल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ट्रेन में सफर कर रहे लोगों को यह समझ मे नहीं आ रहा था कि आगे उनके साथ क्या होगा। ट्रेन के बेपटरी होने के साथ ही डब्बों की लाईट चली गई थी। हर तरफ अंधेरा और उसके बीच शोरगुल - चीख पुकार। मोबाइल फोन की चंद लाइट्स के बीच लोग यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर वह किन हालातों में फंसे हैं। 

सबसे बुरा हाल ट्रेन के उन डब्बों में सवार यात्रियों का था जो बेपटरी होने के पलट चुके थे। इन डब्बों में फंसे यात्रियों को निकलने के लिए दरवाजा नहीं मिल रहा था। एक तरफ का दरवाजा जमीन से सटा होने के कारण बंद था तो वहीं दूसरी तरफ का दरवाजा ऊपर की तरफ। ऊपर के दरवाजे से बाहर निकलना सबके लिए संभव नहीं था। 

मुसीबत के इस वक़्त में सीमांचल एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए उस गांव के लोग फरिश्ता बनकर आये जहां हादसा हुआ। सहदेई बुजुर्ग गांव के लोगों ने इंसानियत की बड़ी मिसाल पेश करते हुए ट्रेन में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। रात के अंधेरे में मोबाइल और टॉर्च की रौशनी लिए गांव से बांस की बनी सीढ़ी लेकर पलटे हुए डब्बों की छत पर चढ़े और घायल यात्रियों तक पहली मदद पहुंचाई। ट्रेन हादसों के बाद अक्सर यह खबरें आती हैं कि घायल यात्रियों को स्थानीय लोगों ने निशाना बनाया और लूटपाट की। लेकिन सहदेई बुजुर्ग गांव के लोगों ने इससे उलट एक इंसानियत की एक नई मिसाल पेश की। 

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