करारा तमाचा! भ्रष्टाचार में निलंबित धनकुबेर MVI की पोस्टिंग में गजब की तेजी,13 को नोटिस,15 को जवाब और 22 को पोस्टिंग...सचिवालय में गजब की चर्चा

करारा तमाचा! भ्रष्टाचार में निलंबित धनकुबेर MVI की पोस्टिंग में गजब की तेजी,13 को नोटिस,15 को जवाब और 22 को पोस्टिंग...सचिवालय में गजब की चर्चा

पटनाः भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे और चार सालों से निलंबित चल रहे परिवहन विभाग के एमवीआई अमिताभ कुमार के आवेदन पर आनन-फानन में एक्शन हुआ। हजार में पगार पाने वाले और भ्रष्टाचार केस में चार सालों से निलंबित एमवीआई के जवाब से परिवहन विभाग पूरी तरह से संतुष्ट हो गया। हफ्ते भर बाद ही निलंबन से हटाकर सीधे भोजपुर में पोस्टिंग कर दी गई। कहा जा सकता है कि इस मामले में चट मंगनी और पट ब्याह वाली कहावत चरितार्थ हुई। भ्रष्टाचार के आरोप में गंभीर रूप से घिरे एमवीआई का निलंबन हटाकर जिला पोस्टिंग का मामला काफी चर्चा में है। अब भ्रष्टाचार में घिरे और निलंबित चल रहे अधिकारियों को भी लगने लगा है कि इस आधार पर वे भी नौकरी में जल्द वापस आ सकते हैं। 

13 तारीख को नोटिस,15 को जवाब और 22 को पोस्टिंग

परिवहन विभाग ने 22 जून को एक आदेश जारी किया है। विभाग के उप सचिव के हस्ताक्षर से ऑर्डर जारी किया गया है। ऑर्डर देखने से यह पता चल रहा कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे एमवीआई की पोस्टिंग में काफी तेजी दिखाई गई। निलंबित एमवीआई अमिताभ कुमार के आवेदन पर परिवहन विभाग ने विचार किया। फिर भ्रष्टाचार में निलंबित चल रहे एमवीआई को 13 जून को नोटिस देकर पक्ष रखने को कहा गया।  आरोपी ने दो दिन बाद यानि 15 जून को अपना पक्ष रखा और विभाग ने 22 जून को निलंबन तोड़ते हुए एक ही आदेश में पोस्टिंग भी कर दिया। यानि पूरी प्रक्रिया महज कुछ दिनों में ही पूरी कर ली गई। 

26 मई को निलंबित एमवीआई ने दिया था आवेदन 

22 जून को परिवहन विभाग के पत्र में कहा गया है कि निलंबित एमवीआई अमिताभ कुमार द्वारा निलंबन मुक्त करने जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान एवं विभागीय कार्यवाही का शीघ्र निष्पादन करने संबंधी दावों पर पटना हाईकोर्ट में अपील दाखिल किया था . केस की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने 17 मई 2022 को न्यायादेश पारित किया. इस आलोक में निलंबित एमवीआई अमिताभ कुमार ने 26 मई 2022 को अनुशासनिक प्राधिकार यानी कमिश्नर को आवेदन समर्पित किया. उस आवेदन पर अनुशासनिक प्राधिकार ने विचार किया.  पक्ष रखने के लिए 13 जून को नोटिस निर्गत किया गया। नोटिस पर अगले 2 दिन बाद यानी 15 जून को ही निलंबित एसबीआई ने लिखित एवं मौखिक रूप से अपना पक्ष रखा. पक्ष में अनुरोध किया गया कि निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान नहीं हुआ है. ऐसे में जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जाए. साथ ही निलंबन के प्रथम वर्ष 50% एवं उसके बाद के वर्षों में वृद्धि कर जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान करने पर विचार किया जाए. साथ ही तीसरा यह कि वे 4 वर्ष 3 माह तक निलंबित रहे हैं,  ऐसे में निलंबन मुक्त किया जाये।

 परिवहन विभाग ने आर्थिक अपराध इकाई पर फोड़ा ठीकरा 

परिवहन विभाग के उप सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. आदेश में कहा गया कि शिवहर के तत्कालीन मोटरयान निरीक्षक अमिताभ कुमार ने हाई कोर्ट का आदेश एवं सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र के आलोक में निलंबन मुक्त करने का आवेदन दिया. इस आधार पर विचार के बाद निलंबन मुक्त करने का निर्णय लिया गया. उप सचिव के पत्र में कहा गया है कि निलंबित एमवीआई ने मौखिक रूप से पक्ष रखा कि वह लंबी अवधि से निलंबित है. विभागीय कार्यवाही प्रभावित करने की स्थिति में नहीं है. जांच कार्य में आर्थिक अपराध इकाई एवं संचालन पदाधिकारी को सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में निलंबन मुक्त करने पर विचार किया जाए.

निलंबन तोड़ने के बाद बना दिया भोजपुर का एमवीआई 

 परिवहन विभाग के पत्र में कहा गया है कि आर्थिक अपराध इकाई से इनके विरुद्ध कोर्ट में दाखिल आरोपपत्र की प्रति मांगी गई. आर्थिक अपराध इकाई ने 3 फरवरी 2021 को सूचित किया था कि अनुसंधान पूर्ण होने पर केस में चार्जशीट दाखिल किया जाएगा. उसके बाद उसकी प्रति उपलब्ध करा दी जाएगी. इससे स्पष्ट है कि आर्थिक अपराध इकाई ने आरोप पत्र समर्पित नहीं किया. अमिताभ कुमार को आर्थिक अपराध इकाई से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर ही 7 फरवरी 2018 को निलंबित किया गया था . आर्थिक अपराध इकाई ने इस मामले में इनके विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल नहीं किया. इस स्थिति में निलंबित रखने का कोई आधार नहीं है. ऐसे में इन्हें तत्काल निलंबन मुक्त किया जाता है. परिवहन विभाग ने निलंबन मुक्त करने के साथ ही मोटरयान निरीक्षक को भोजपुर में पदस्थापित भी कर दिया है.

बता दें, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम ने 17 नवंबर 2017 को पटना से ट्रांसफऱ करा कर शिवहर गए एमवीआई अमिताभ कुमार के पटना समेत तीन जिलों में चार ठिकानों पर छापेमारी की थी। रेड में ‘धन कुबेर’ बने एमवीआई (मोटर यान निरीक्षक) की करोड़ों की संपत्ति की हकीकत सामने आ गई थी। जांच टीम ने राजधानी के आनंदपुरी मुहल्ले में स्थित एमवीआई अमिताभ के निजी घर व किराए के फ्लैट में चल रहे प्राइवेट ऑफिस के अलावा बक्सर के कोपवां गांव स्थित पैतृक घर व शिवहर में ऑफिस को खंगाला। घर में 950 ग्राम सोने के आभूषण मिले। 2 लाख नकद व शॉपिंग कार्ड बरामदगी के साथ ही एमवीआई व उनकी पत्नी के नाम बैंकों में 28 लाख कैश डिपॉजिट हैं। पटना से दिल्ली तक रियल एस्टेट, बैंक व वित्तीय संस्थानों में निवेश का पता चला . बैंक लॉकर का भी पता चला. बक्सर के कोपवां गांव के अमिताभ वर्ष 2011 में एमवीआई नियुक्त हुए थे। उस समय उनकी मासिक पगार महज 25 हजार रुपए थी। छापेमारी के समय वेतन करीब 40 हजार रुपए थी। पटना के बाद शिवहर जिले में पोस्टेड हुए एमवीआई करीब साढ़े छह वर्षों में ही अवैध कमाई के जरिए करोड़पति बन गए। 

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