छोटे मोदी बन गए चुनाव आयुक्त !ऑनलाइन चुनाव के जरिये गरीबों के वोट का अधिकार छिनने की साजिश सफल नहीं होने देंगे-HAM

छोटे मोदी बन गए चुनाव आयुक्त !ऑनलाइन चुनाव के जरिये गरीबों के वोट का अधिकार छिनने की साजिश सफल नहीं होने देंगे-HAM

Patna: बिहार सरकार के उपकप्तान और प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता सुशील मोदी का ऑनलाइन चुनाव करने का बयान धीरे-धीरे राजनीतिक रंग पकड़ते जा रहा है. सुशील मोदी ने कहा है कि कोरोना ने दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. संयोग है कि इसी साल बिहार विधानसभा चुनाव भी होने वाला है. मोदी ने कहा है कि अब चुनाव डिजिटल तरीके से होगा. यह बात जैसे ही मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंची तो सियासतदानों ने इसे हाथों हाथ लिया और फिर मोदी पर गरीब विरोधी होने का आरोप भी लगा दिया.

अपने को चुनाव आयुक्त न समझें मोदी जी
हम प्रवक्ता धीरेंद्र कुमार मुन्ना ने सुशील मोदी पर हमला करते हुए कहा है की मोदी जी अपने को चुनाव आयुक्त न समझें. उनके द्वारा अचानक ऑनलाइन चुनाव की बात करना उनके पार्टी  का और खुद उनके गरीब विरोधी होने की मानसिकता को दर्शाता है. आखिर इस बयान को देने से पहले क्या उन्होंने इस बाबत विपक्ष से पूछना मुनासिब समझा ? सुशील मोदी बता सकते हैं की ऑनलाइन चुनाव करवाने के लिए जिस डिजिटल प्लेटफार्म की बात कर रहे हैं क्या वह बिहार के करोड़ों गरीबों के पास उपलब्ध है. बिहार के कितने प्रतिशत लोगों के पास मोबाइल उपलब्ध है मोदी जी ? जिसके घर में दोनों सांझ का चूल्हा नहीं जलता,पेट की आग में रात भर लोगों को नींद नहीं आती, वहां डिजिटल चुनाव की बात क्या बेईमानी नहीं है. यह जानबूझकर किया गया गरीबों का लोकतांत्रिक अपमान है. जनता इसका बदला जरूर लेगी.

भूखे पेट ,नंगे पैर, सुलगती सड़कों पर सरकते बिहारीं मजदूरों का मजाक मत उड़ाइये
धीरेंद्र कुमार मुन्ना ने कहा है कि सुशील मोदी जी हिंदुस्तान की सड़कों पर भूखे पेट, नंगे पैर और सुलगती सड़कों पर बिहारी मजदूरों का सरकते जत्थे को जरा जी भरकर  देखिए और अपने जमीर को जगाइए. कोरोना की आड़ में गरीबों के हक को छीनने की बात मत कीजिए. यह हम लोग नहीं होने देंगे. लोकतंत्र में एक तरफा फैसला नहीं लिया जाता. कम से कम जनता की राय जरूर ली जानी चाहिए विपक्ष की बात छोड़ दें. क्योंकि विपक्ष आपके चाल,चरित्र और चेहरा के बारह रुपिये रंग से वाकिफ है. आप एसी रूम में बैठकर चुनाव का नीति निर्धारण न करें. इसके लिए इस लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव आयुक्त का पद है जो चुनाव से संबंधित निर्णय लेता है. आपका यह बयान साबित करता है कि आप गरीबों का ना सिर्फ उपहास उड़ा रहे हैं बल्कि आप गरीबों के सबसे बड़े हक वोट के अधिकार को छीनने की साजिश भी शुरू कर चुके हैं. आपने अपनी ही पार्टी का बेड़ा तो गर्क किया ही है. कम से कम बिहार के मुखिया नीतीश कुमार को तो बख्श दीजिए. कोई भी समझदार राजनीतिज्ञ चुनाव को लेकर इस तरह का बयान नहीं दे सकता. जहां लोग पेट भरने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं  वहां डिजिटल चुनाव की बात करना सुशील मोदी और भाजपा के सामंती चेहरा को उजागर करता है. 

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