15 साल बाद छलका दर्द : युवराज सिंह ने कहा मैं बननेवाला था टीम का कप्तान, न जाने कहां से धोनी आ गए, इस क्रिकेटर को बताया जिम्मेदार

15 साल बाद छलका दर्द : युवराज सिंह ने कहा मैं बननेवाला था टीम का कप्तान, न जाने कहां से धोनी आ गए, इस क्रिकेटर को बताया जिम्मेदार

DESK : कभी भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े स्टार और 2011 विश्व कप के हीरो युवराज सिंह को टीम इंडिया की कप्तानी नहीं कर पाने का दर्द आज भी सताता है। उन्होंने कहा है कि 2007 में जब धोनी को टीम की कप्तानी सौंपी गई, उस समय मैं कप्तान बनने वाला था, लेकिन अचानक धोनी का नाम सामने आ गया और उन्हे टीम की कप्तानी दे दी गई।

युवराज सिंह ने स्पोर्ट्स18 पर साक्षात्कार के दौरान संजय मांजरेकर से कहा, ‘मुझे कप्तान बनना था। फिर ग्रेग चैपल की घटना घटी। चैपल या सचिन में से किसी एक को चुनना था। मैं शायद एकमात्र खिलाड़ी था, जिसने अपने साथी खिलाड़ी का समर्थन किया। 

किसी को भी कप्तान बना देंगें, लेकिन तुम्हें नहीं

युवराज ने बताया कि बीसीसीआई के कुछ पदाधिकारियों को यह पसंद नहीं आया। मैंने यही सुना कि वे किसी को भी कप्तान बना देंगे, लेकिन मुझे नहीं। मुझे यकीन नहीं है कि यह कितना सच है। लेकिन अचानक उप-कप्तानी से मुझे हटा दिया गया। सहवाग टीम में नहीं थे। मुझे लगा कि मैं कप्तान बनने जा रहा हूं। लेकिन फिर सब बदल गया और धोनी को कप्तान बना दिया गया।

तेंदुलकर को बताया जिम्मेदार

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह का कहना है कि सचिन तेंदुलकर का समर्थन करने के कारण उन्हें कप्तानी नहीं मिली। यही नहीं, उनके हाथ से उप कप्तानी भी चली गई। युवराज सिंह ने बताया कि एक समय ऐसा आया था, जब उन्हें ग्रेग चैपल और सचिन तेंदुलकर में से किसी एक को चुनना था। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का समर्थन किया। यही बात भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कुछ लोगों को यह नागवार गुजरा और उनके हाथ से कप्तानी निकल गई। 

न जाने कहां से आ गए धोनी

यही नहीं, पूर्व ऑलराउंडर ने यह भी दावा कि 2007 में नजाने कहां से एमएस धोनी आ गए और कप्तान बन गए। युवराज सिंह ने बताया कि 2007 विश्व कप के बाद भारत ने इंग्लैड का दौरा किया था। उस समय द्रविड़ कप्तान थे और मैं उप कप्तान। इस दौरे के बाद द्रविड़ ने कप्तानी छोड़ने का फैसला लिया। ऐसे में मैं कप्तान बनने का दावेदार था, लेकिन टीम  के साथियों का समर्थन नहीं मिला। यहां तक कि कई सीनियर खिलाड़ियों के रहते न जाने कहां से धोनी का नाम सामने आया और उन्हें टीम की कप्तानी सौंप दी गई। 

कप्तान नहीं बन पाने का अफसोस

युवराज ने बताया कि हर क्रिकेटर की चाहत होती है कि वह टीम की कप्तानी करे। मेरी भी थी। लेकिन यह नहीं हुआ। हालांकि युवराज ने बताया कि उन्हें कप्तानी नहीं मिलने का अफसोस नहीं था, क्योंकि धोनी ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। साथ ही इस दौरान कई बार इंजरी के कारण मुझे भी टीम से बाहर होना पड़ा, ऐसे में कप्तानी करना संभव नहीं हो पाता।

बता दें कि 2007 टी-20 विश्वकप में धोनी ने पहली बार कप्तानी की थी और टीम  इंडिया चैंपियन बनी थी। सीरीज में युवराज सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ छह  गेंद में छह छक्के लगाए थे।


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