ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर किये जा रहे फाइन की राशि को घटा रही है राज्य सरकार, केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ने मांगी कानूनी राय

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर किये जा रहे फाइन की राशि को घटा रही है  राज्य सरकार, केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ने मांगी कानूनी राय

NEWS4NATION DESK : 1 सितंबर से मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 के लागू होने के बाद से  टैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना वसूल की जा रही हैं। वहीं केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय द्वारा तय की जुर्माने की भारी भरकम राशि का विरोध हो रहा है। कई राज्यों ने इसे मानने से इंकार कर दिया है। वहीं कई राज्य जुर्माने की राशि घटा रहे है।

यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना घटाने पर और अधिक राज्यों के विचार करने के बीच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस बारे में कानूनी राय मांगी है कि क्या संशोधित कानून में तय न्यूनतम जुर्माने को राज्य घटा सकते हैं? 

इस मामले को लेकर इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, 'हमने विधि मंत्रालय के कानून विभाग से इस बारे में राय मांगी है कि क्या राज्यों को संशोधित अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम जुर्माने को घटाने का अधिकार है?
 अधिकारी ने कहा कि राज्यों द्वारा जुर्माने को घटाए जाने की खबरों के बाद कानून मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगने वाला पत्र बुधवार को भेजा गया था। उन्होंने कहा कि कानून मंत्रालय से स्पष्टीकरण मिल जाने पर हम उनके जवाब के आधार पर उपयुक्त कदम उठाएंगे।

अधिकारी ने बताया कि संशोधित कानून के तहत जहां यातायात नियम उल्लंघन के लिए 'इतने तक जुर्माना' का जिक्र है, राज्य जुर्माने के बारे में फैसला कर सकते हैं लेकिन जहां यह निर्धारित (फिक्स्ड) जुर्माना है, वहां प्रावधान के मुताबिक जुर्माना नहीं घटाया जा सकता।

वहीं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रीने जुर्माने में वृद्धि का बचाव करते हुए कहा है कि यह राजस्व अर्जित करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की बेशकीमती जान बचाने के लिए है। गौरतलब है कि भारत में हर साल करीब पांच लाख सड़क हादसे होते हैं जिनमें लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत होती है और अन्य तीन लाख अपंग हो जाते हैं।

बता दें गुजरात और उत्तराखंड की बीजेपी सरकारों ने जुर्माने की राशि घटाने की पहले ही घोषणा कर दी है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार जुर्माना घटाने पर विचार कर रही है। मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे विपक्षी दल शासित राज्यों ने भी नया कानून लागू करने से इनकार किया है।

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