मांझी-सहनी को बता दी हैसियत, जातिगत जनगणना पर जवाब देने के लिए बीजेपी ने उतार दी मंत्रियों की फौज

मांझी-सहनी को बता दी हैसियत, जातिगत जनगणना पर जवाब देने के लिए बीजेपी ने उतार दी मंत्रियों की फौज

नीरज बबलू ने बताया उम्रदराज नेता, जनक राम ने कहा मेरे साथ अयोध्या चलें

PATNA : बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर एनडीए के घटक दल हम के अध्यक्ष जीतन राम मांझी और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जिस तरह से अपनी बात कही है, उसके बाद दोनों नेता बीजेपी के तमाम मंत्रियों ने उनकी हैसियत बता दी है। मामले में  जातिगत जनगणना को लेकर बीजेपी ने अपने मंत्रियों की पूरी फौज उतार दी है. जिनमें नीरज बबलू, जनक राम, अमरेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य नेता भी शामिल हैं। 

नीरज बबलू ने मांझी को बताया बुड्ढा

जीतन राम मांझी द्वारा जातिगत जनगणना को देश की जरुरत बताने की बात पर जब नीरज बबलू से बात की गई तो उन्होंने मांझी को उम्रदराज बता दिया। उन्होंने कहा कि मांझी जी को इस उम्र में ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए। इस राज्य में जातिगत जनगणना से ज्यादा जरुरी अल्पसंख्यकों की गिनती जरुरी है, ताकि जो लोग बाहर से आकर अवैध रूप से रह रहे हैं, उसकी सही जानकारी सामने आ सके। साथ ही उन्होंने मांझी को नसीहत भी दे डाली कि उन्हें जनसंख्या नियंत्रण पर बात करनी चाहिए।

अमरेंद्र प्रताप के निशाने पर मांझी – पहाड़ नहीं टूट रहा है

नीरज बबलू की तरह बिहार के कृषि मंत्री अमरेंद्र कुमार सिंह के निशाने पर भी मांझी ही रहे। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि जातिय जनगणना जरुरी है, लेकिन जीतन राम मांझी को ऐसा लगता है, तो उनका नजरिया है। जातिगत जनगणना नहीं होने से कोई पहाड़ नहीं टूट रहा है. बिना जातिगत जनगणना के भी पिछड़ों के विकास के लिए बेहतर काम हो रहा है। 

 इस दौरान उन्होंने बिहार भाजपा के द्वारा जातिगत जनगणना का समर्थन करने का बचाव भी किया। कृषि मंत्री ने कहा कि हमारी बात अलग है, लेकिन केंद्र को लगता है कि इसमें कई प्रकार की कठिनाई है, तो हमें केंद्र का समर्थन करना चाहिए। 

अयोध्या घूमने चलें मांझी

इन सबके बीच मंत्री जनक राम ने मांझी के साथ जातिगत जनगणना के लिए पांच करोड़ देने की घोषणा करनेवाले मुकेश सहनी को भी निशाने पर ले लिया। उन्होंने कहा कि छोटी छोटी पार्टियों को लगता है कि जातिगत जनगणना से उन्हें पिछड़ो का वोट हासिल हो जाएगा। अगर वह ऐसा सोचते हैं, तो उनकी गलतफहमी है। इस दौरान जनक राम ने जीतन राम मांझी को काम से फुरसत निकालकर अयोध्या जाकर श्रीराम से मिलने की नसीहत भी दे डाली।

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