धनकुबेर अफसरः अनुभूति श्रीवास्तव व JE राहुल सिंह 'भ्रष्टाचार' में साथ-साथ ! दोनों ने मिलकर सरकारी खजाने को लूटा पर जेई पर एक्शन नहीं, DM की जांच रिपोर्ट पढ़ें....

धनकुबेर अफसरः अनुभूति श्रीवास्तव व JE राहुल सिंह 'भ्रष्टाचार' में साथ-साथ ! दोनों ने मिलकर सरकारी खजाने को लूटा पर जेई पर एक्शन नहीं, DM की जांच रिपोर्ट पढ़ें....

PATNA: बिहार में एक से बढ़कर एक धन कुबेर सरकारी अफसर हैं। बिहार नगर सेवा का एक अधिकारी बड़ा नटवरलाल निकला। उसकी पहुंच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करोड़ों का घोटाला किया,जांच हुई और फिर जांच वाली फाईल को सचिवालय में डंप करा दिया। भभुआ का तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव अपने खास जूनियर इंजीनियर राहुल सिंह के साथ मिलकर जमकर माल बनाया। डीएम की जांच रिपोर्ट में कनीय अभियंता की नियुक्ति को ही कटघरे में खड़ा किया गया। 16 अगस्त को भभुआ नप के पूर्व सभापति ने जनता दरबार में शिकायत की। तब जाकर सचिवालय में बैठे बड़े अधिकारियों की नींद खुली। आनन-फानन में 18 अगस्त को नटवरलाल अफसर अनुभूति श्रीवास्तव को सस्पेंड किया गया। फिर 1 सितंबर को घोटालेबाज अनुभूति श्रीवास्तव के ठिकानों पर विशेष निगरानी इकाई की छापेमारी हुई। कार्यपालक पदाधिकारी पर तो कार्रवाई हुई लेकिन जांच रिपोर्ट में जुनियर इंजीनियर को गलत तरीके से बहाल करने वालों और जुनियर इंजीनियर राहुल सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 

3 सितंबर 2020 को डीएण को सौंपी गई थी जांच रिपोर्ट

3 सितंबर 2020 को वरीय उप समाहर्ता अमरेश कुमार अमर और कार्यपालक अभियंता सुखदेव राम ने संयुक्त जांच रिपोर्ट कैमूर के डीएम को दिया था. जांच रिपोर्ट में भभुआ के तत्कालीन नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव पर गड़बड़ी के आरोप प्रमाणित पाये गये थे। नगर परिषद के पूर्व सभापति बजरंग बहादुर सिंह की शिकायत पर जांच की गई थी. जांच में पाया गया कि योजनाओं में भारी गड़बड़ी की गई है. सबसे खास बात तो ये की अनुभूति श्रीवास्तव ने पटना के रहने वाले राहुल सिंह को कनीय अभियंता के पद पर नियोजित करवाया था .उन्हें दैनिक पारिश्रमिक पर रखा गया था. जांच टीम ने पूछा कि दैनिक पारिश्रमिक पर कनीय अभियंता नियुक्ति करने के पूर्व क्या प्रतिनियुक्ति हेतु तत्कालीन जिला पदाधिकारी कैमूर को कोई अनुरोध किया गया था? इस संबंध में कोई विज्ञापन निकाला गया था? यह पूछे जाने पर कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई थी. जांच के समय कनीय अभियंता की खोज भी की गई थी तो बताया गया था कि वह अवकाश का आवेदन देकर कार्यालय से अनुपस्थित हैं.

अनुभूति श्रीवास्तव के घोटाले में राहुल सिंह देता था साथ  

जांच टीम ने जांच के बाद जो निष्कर्ष निकाले थे वह इस प्रकार थे। राहुल सिंह कनीय अभियंता को दैनिक पारिश्रमिक पर नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया नियम अनुकूल नहीं प्रतीत होती है. योजनाओं की निविदा में घालमेल किया गया. फर्जी लेटर पैड का उपयोग कर योजनाओं की राशि का भुगतान किया गया. जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि कनीय अभियंता राहुल सिंह और अनुभूति श्रीवास्तव एवं अन्य के बैंक खातों से लेन-देन का विस्तृत ब्यौरा, राहुल सिंह कनीय अभियंता के दोस्त एवं पत्नी के नाम पर बनाई गई संपत्ति का ब्यौरा, अनुभूति श्रीवास्तव के बैंक खातों एवं उनसे जुड़े हुए सगे संबंधियों की संपत्ति का ब्यौरा जिस प्रकार से दिया गया है उसकी जांच विभागीय स्तर से अथवा सक्षम एजेंसी से कराया जाना उचित प्रतीत होता है.

छापेमारी में अकूत संपत्ति का चला है पता

भभुआ के नगर परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी रहे अनुभूति श्रीवास्तव के पटना स्थित फ्लैट पर स्पेशल विजिलेंस की कार्रवाई में जो खुलासे हुए हैं, उससे छापेमारी कर रही टीम भी सकते में है. 12 घंटे से अधिक समय तक चली छापेमारी में निलंबित कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के पटना के रुकनपुरा स्थित अपार्टमेंट के फ्लैट में अकूत संपत्ति के कई सबूत मिले हैं.अनुभूति श्रीवास्तव ने पटना में ही दूसरा फ्लैट भी ले रखा है. इसके अलावा इनका तीसरा फ्लेट इंदौर में भी है. इन दोनों फ्लैट से संबंधित एग्रीमेंट के सबूत विजिलेंस टीम को मिले हैं. इसके अलावा अनुभूति श्रीवास्तव ने अपने पत्नी और बच्चे के नाम से इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड की कई पॉलिसी भी ले रखी है. कार्यपालक पदाधिकारी 15 लाख रुपए से अधिक का प्रीमियम हर साल जमा करते हैं. निलंबित कार्यपालक पदाधिकारी के पास इनोवा, अर्टिगा जैसी लग्जरी गाड़ियां भी बरामद हुई हैं.

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