बिहार पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की सख्त नसीहत, दिल्ली पुलिस से सीख लें और उसी तर्ज पर करें काम, शराबबंदी कानून में न हो धड़ाधड़ गिरफ्तारी

बिहार पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की सख्त नसीहत, दिल्ली पुलिस से सीख लें और उसी तर्ज पर करें काम, शराबबंदी कानून में न हो धड़ाधड़ गिरफ्तारी

पटना. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस को सख्त नसीहत दी है. शीर्ष न्यायालय ने बिहार पुलिस के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए का है कि उसे दिल्ली पुलिस से सीखने की जरूरत है. दरअसल, बिहार पुलिस आम तौर पर मजिस्ट्रेट ट्रायल से जुड़े मामलों यानी सीआरपीसी -41ए में भी आरोपियों को गिरफ्तार करती है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट ट्रायल के मामले में दिल्ली पुलिस गिरफ्तार नहीं करती बल्कि धारा-41ए का नोटिस भेजती है. बिहार पुलिस को भी ऐसा ही करना चाहिए. 

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ बिहार में मद्यनिषेध कानून के कारण उच्च न्यायालय में जमानत आवेदनों की भरमार और उनकी सुनवाई में हो रही देरी के मामले में सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शराबबंदी कानून के तहत बिहार पुलिस द्वारा की जा रही धड़ाधड़ गिरफ्तारियों पर चिंता जताई. कोर्ट ने बिहार पुलिस को सुझाव दिया कि जो मामले सीआरपीसी की धारा-41ए के तहत आती हैं उनमें गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है. 

शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस की तरह बिहार पुलिस भी तुरंत गिरफ्तार न करे और धारा-41ए के तहत उसे पहले नोटिस दे. गिरफ्तारी तभी की जाए जब उसके भागने की संभावना हो. यदि अभियुक्त पुलिस के समक्ष पेश हो जाता है तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाए. शराबबंदी कानून के नाम पर धड़ाधड़ गिरफ्तारियां होने से अदालतों में जमानत की याचिकाएं दायर हो रही हैं. 

कोर्ट ने स्पष्ट सुझाव दिया कि बिहार सरकार सीआरपीसी की धारा-41ए के शासनादेश को प्रभावी करने के लिए यदि आवश्यक हो तो किसी भी संशोधन/ सुधार के साथ समान दिशा-निर्देशों को लागू कर सकती है. जैसे दिल्ली में लागू है उसी अनुरूप बिहार पुलिस भी अपने यहां नियमों को बनाए. उच्चतम न्यायालय ने पटना उच्च न्यायालय को मुकदमों की लिस्टिंग में होने वाली देरी और जमानत आवेदनों की बड़ी संख्या में लंबित होने की समस्या से निपटने के लिए एमाइकस क्यूरी (न्याय मित्र) के सुझावों को लागू करने पर विचार करने के लिए भी कहा है. 


Find Us on Facebook

Trending News