पारंपरिक खेती को छोड़कर व्यावसायिक कृषि से अपनी किस्मत बदल रहे हैं कैमूर के किसान, बन रहे हैं उदाहरण

पारंपरिक खेती को छोड़कर व्यावसायिक कृषि से अपनी किस्मत बदल रहे हैं कैमूर के किसान, बन रहे हैं उदाहरण

 कैमूर। जिले में किसान आत्मनिर्भर बनने की ठाना है। जहां कोरोना काल में सब जगह रोजगार के लिए लोग दर-दर भटक रहे हैं, वहीं कैमूर के किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर के व्यवसाय खेती के तरफ नई पीढ़ी ध्यान दे रहे हैं। पहले  कैमूर के किसानों ने मौसम के विपरीत जाकर स्ट्रॉबेरी की खेती की, जिसमें अच्छा मुनाफा हुआ। अब कैमूर जिले में स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ केले की खेती भी धूम मचा रहा है। कैमूर जिले के कुदरा, भभुआ, रामगढ़ और नुआन्व प्रखंड में कई किसान केले की खेती आज कर लाखों कमा रहे हैं। कृषि विभाग भी इनके इस कार्य की सराहना करता है। किसानों को सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई योजना के तहत 90% सिंचाई वाले यंत्र में अनुदान मिल रहा है। कोरोना काल से पहले जो लोग बाहर बड़े-बड़े फैक्ट्रियों में और कंपनियों में काम करते थे। वह जब घर लौटे तो उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं रहा। जिसके बाद वह मोदी जी के आत्मनिर्भर बनने के राह पर चलने लगे और कैमूर जिले में धान गेहूं से हटकर अब स्ट्रॉबेरी और केला की खेती किया जा रहा है। 

नुआन्व प्रखंड के मुखरान्व के किसान बताते हैं धान और गेहूं की खेती में फायदा नहीं हो पाता था। घर का बजट चलाना भी मुश्किल होता था। हमारे यहां खेती करने के सभी संसाधन सड़क, पानी, बिजली उपलब्ध है। इसलिए हम लोगों ने पारंपरिक खेती छोड़ कर के केला की खेती करना शुरू किया। हम लोग महाराष्ट्र के एक कंपनी से संपर्क कर महाराज से बीज मंगाया। पता करने पर जानकारी मिला कि 70 से 80 हजार रुपये प्रति बीघा केला की खेती करने में खर्चा होता है। एक बीघे में 800 पौधा लगता है। एक केला के पेड़ से 30 केजी केला निकलता है तो साल भर में 240 केजी केला का पैदावार होगा और धान गेहूं मात्र साल भर में इतने ही खेत में 30 से 40 क्विंटल ही उपज हो पाएगा। केला का बिक्री करने के बाद आमदनी भी अच्छा है । यहां लोकल मार्केट में केला का अच्छा डिमांड है। इसलिए हम लोग केला का खेती कर रहे हैं।

जिला कृषि पदाधिकारी ललिता प्रसाद बताते हैं पारंपरिक खेती छोड़ कर के किसान दूसरे भी खेती की तरफ जा रहे हैं। हम लोग किसानों को लगातार प्रेरित भी कर रहे हैं जिससे कि किसानों की आय दोगुना होगा। कैमूर जिले के दो ब्लॉक में केले की खेती हो रही है कुदरा के सीसवार और नुआन्व के मुखरान्व में केले की खेती हो रही है । जहां डीप इरीगेशन भी लगा हुआ है। ड्रिप इरिगेशन में 90% अनुदान सरकार देती है जो उनके खाते में जाती है। हम लोग किसानों को समय-समय पर ट्रेनिंग देते रहते हैं और उनको कृषि विभाग की योजनाओं से जुड़ रहे। जैसे उनको सरकारी लाभ मिल सके।


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