फंस गए एसडीपीओ! कोर्ट ने पूछा - जहां गोली चली, दो घायल भी हुए, फिर कैसे हटा दिया धारा 307

फंस गए एसडीपीओ! कोर्ट ने पूछा  - जहां गोली चली, दो घायल भी हुए, फिर कैसे हटा दिया धारा 307

GOPALGANJ : बिहार पुलिस की छवि पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यहां एक आईपीएस पर साजिश रचने के आरोप लग रहे हैं। एक दूसरे आईपीएस पर हाईकोर्ट यह टिप्पणी करती है कि छह साल के मासूम बच्ची को वह तलाश नहीं सकते हैं। अब कोर्ट ने एक एसडीपीओ के काम पर सवाल उठा दिए हैं। आरोप है कि हत्या के प्रयास के मामले में एसडीपीओ ने आरोपियों को  बचाने के लिए पूरी धारा को ही गायब कर दिया है। मामले में हुई सुनवाई के दौरान जज ने भी हैरानी जताई और एसपी को पूरे मामले में एक माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामला गोपालगंज के एसडीपीओ संजीव कुमार से जुड़ा है। प्रभारी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्रा ने एक केस की सुनवाई के दौरान गड़बड़ी पकड़ी। पूछा कि एसडीपीओ संजीव कुमार बताएं कि जहां गोली चली, दो लोगों को लगी, जख्म प्रतिवेदन रिपोर्ट भी है, इसके बाद कैसे धारा 307 को हटाया गया।

मामला इस साल के 15 मई का है, जब दो पक्षों में हुई गोलीबारा के मामले में घायल विजय राय की शिकायत पर विशम्भरपुर थाना में  संजय राय, मुन्ना राय, रामप्रवेश राय, मोतिलाल राय, सुरेश राय, अनुप राय के खिलाफ147,148,149, 341, 323,504, 307 के साथ आयुध अधि. की धारा 27  के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस को मौके से गोलियो के खोखे सहित जिंदा कारतूस भी मिले, जो बताते हैं कि गोलीबारी की घटना हुई थी। इस गोलीबारी में विजय राय को गोली भी लगी। साथ ही दोनों पक्ष की तरफ से इसे स्वीकार किया गया।

लेकिन 31 अगस्त को पुलिस की तरफ से जो आरोप पत्र दायर किए गए, उसमें हत्या की कोशिश को लेकर दर्ज धारा 307 को हटा दिया गया। कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान वादी के वकील ने अनुसंधानकर्ता और गोपालगंज के एसडीपीओ पर आरोप लगाया कि उन्होंने अभियुक्तों को बचाने के लिए धारा 307 में आरोप पत्र समर्पित नहीं किया गया। जबकि सारे साक्ष्य यह बतातें हैं कि हत्या की कोशिश की गई।


सुनवाई के दौरान वादी के वकील की दलीलों पर सहमति जताते हुए कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर किस परिस्थिति में गोपालगंज एसडीपीओ संजीव कुमार ने 26 अगस्त को अनुसंधानकर्ता को प्राथमिकी में अंकित धारा-307 को आरोप पत्र में समावेश नहीं करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अब तक तो जो साक्ष्य सामने आए हैं, उसमें प्रथम दृष्टया एसडीपीओ पर लगे आरोप सत्य प्रतीत होते हैं।

30 दिन में मागी रिपोर्ट

कोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले की जांच एसपी स्वयं करें। सच्चाई से अवगत कराएं। जांच में अगर एसडीपीओ दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई करें। यह रिपोर्ट 30 दिनों के अंदर कोर्ट को देनी होगी। कोर्ट के इस आदेश की छायाप्रति पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पटना, पुलिस उपमहानिरीक्षक सारण एवं पुलिस अधीक्षक गोपालगंज को भेजी गई है। 


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