सूर्य देवता मानव शरीर के सबसे बड़े रक्षक, कई बड़ी बीमारियों से सीधे करते हैं हमारी रक्षा, बिहार व बिहारियों ने यह साबित कर दिखाया : डॉ रिदु कुमार

सूर्य देवता मानव शरीर के सबसे बड़े रक्षक, कई बड़ी बीमारियों से सीधे करते हैं हमारी रक्षा, बिहार व बिहारियों ने यह साबित कर दिखाया : डॉ रिदु कुमार

PATNA : भगवान भाष्कर को दुनिया दुनिया का सबसे बड़ा चिकित्सक अगर कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।  छठ के पवित्र मौके पर पूरा बिहार भगवान भास्कर की आराधना में लीन है। छठ पूजा से बिहारियों का ऐतिहासिक व अद्भुत रिश्ता रहा है । आप यह भी कर सकते हैं की बिहारी भगवान सूर्य के सबसे बड़े साधक हैं । यही कारण है कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के काल में बिहार की 12 करोड़ आबादी में से सिर्फ सात लाख 26 हजार लोग ही पीड़ित हुए। उपरोक्त बातें बिहार के प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ रिदु कुमार ने news4nation से बातचीत करते हुए कहीं।

डॉ रिदु सूर्य देव के वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए कहते हैं की भगवान भास्कर स्वास्थ्य के सबसे बड़े स्रोत हैं यही वजह है कि उन्हें मानव शरीर का सबसे बड़ा आरक्षक भी कहा जाता है विभिन्न शोधों के मुताबिक यह साबित हुआ है कि सूरज की किरणों के सम्पर्क में आने से व्यक्ति का स्किन नाइट्रिक ऑक्साइड रिलीज करती है। जो शरीर के लिये फायदेमंद होता है। यह सबको पता है कि सूरज की किरणों में विटामिन D होता है जो रोग रोधी है । कई रिसर्च संस्थानों ने अपने शोध पत्र में यह बताया है की सूरज का सूरज के किरणें शरीर को कई बड़ी बीमारियों से सीधे तौर पर बचाता है इसमें बताया गया है कि संतुलित मात्रा में सूर्य की किरणों से मस्तिष्क सेरोटोनिन नाम का हार्मोन रिलीज करता है जो व्यक्ति को एकाग्रचित्त होने में मदद करता है ।इतना ही नहीं सूरज की किरणें व्यक्ति में एक पॉजिटिव वाइब्स देता है जिससे व्यक्ति डिप्रेशन में जाने से बचता है। 

इतना ही नहीं विटामिन डी से ना केवल हड्डियां मजबूत होती है बल्कि विटामिन डी की वजह से शरीर का इम्यूनिटी पावर भी बढ़ता है। साथ ही यह भी साबित हुआ है कि सूरज के संपर्क में रहने वाले लोग ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से लड़ने में ज्यादा सक्षम होते हैं। कई शोधों के मुताबिक सुबह-सुबह 20 से 30 मिनट तक सूरज की किरणों के बीच रहने से शरीर चुस्त दुरुस्त रहता है।

 सूर्य देवता की आराधना और कठिन तप का असर बिहारियों पर कैसे हुआ यह स्पष्ट तौर पर देखने को तब मिला जब वैश्विक महामारी कोरोना अपना कहर ढा रही थी। भगवान भाष्कर के साधना का वैज्ञानिक असर यह हुआ कि कोरोना काल में 12 करोड़ की बिहारी आबादी में से मात्र 7:30 लाख के करीब लोग ही पीड़ित हुए।

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