मोदी सरकार की नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, छह साल पहले रातों-रात हजार और 500 रुपये का नोट कर दिया था बंद

मोदी सरकार की नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, छह साल पहले रातों-रात हजार और 500 रुपये का नोट कर दिया था बंद

Desk. मोदी सरकार की नोटबंदी पर आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा। नोटबंदी के खिलाफ  सुप्रीम कोर्ट में 58 याचिकाएं दाखिल हुई थीं, जिस पर शीर्ष कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने 7 दिसंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी। इसी आज फैसला आएगा।

मोदी सरकार ने 2016 में 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों को बंद करने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि सरकार ने बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए अचानक 500 और 1000 के पुराने नोट प्रचलन से बाहर कर दिए थे। इसके जवाब में सरकार ने कहा है कि यह टैक्स चोरी रोकने और काले धन पर लगाम लगाने के लिए लागू की गई सोची-समझी योजना थी। फैसला सुरक्षित रखते समय कोर्ट ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक को नोटबंदी के फैसले से जुड़ी प्रक्रिया के दस्तावेज सौंपने को कहा था।

रिजर्व बैंक की दलील

केंद्र सरकार ने यह दावा भी किया कि नोटबंदी की सिफारिश रिजर्व बैंक ने की थी। इसे काफी चर्चा और तैयारी के बाद लागू किया गया था। रिजर्व बैंक के लिए पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि यह एक आर्थिक निर्णय था। इसकी कोर्ट में समीक्षा नहीं हो सकती। यह एक नीतिगत फैसला था, जिस पर उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले से लोगों को शुरुआती दिक्कतें हुईं, लेकिन इसका मकसद देश को मजबूत करना था।

'सरकार ने नहीं दी पूरी जानकारी'

याचिकाकर्ता पक्ष की तरफ से सबसे पहले वरिष्ठ वकील चिदंबरम ने बहस की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने नोटबंदी के फैसले से पहले की प्रक्रिया की ठीक से जानकारी नहीं दी है। न तो 7 नवंबर, 2016 को सरकार की तरफ से रिजर्व बैंक को भेजी चिट्ठी रिकॉर्ड पर रखी गई है, न यह बताया गया है कि रिजर्व बैंक की सेंट्रल बोर्ड की बैठक में क्या चर्चा हुई। 8 नवंबर को लिया गया कैबिनेट का फैसला भी कोर्ट में नहीं रखा गया है।

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