खतना प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- महिलाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन

खतना प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- महिलाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन

NEW DELHI : दाऊदी  बोहरा मुस्लिम समुदाय में प्रचलित नाबालिग लड़कियों का खतना करने की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिलाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं का खतना केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि उन्हें शादी करनी है या अपने पति को खुश करना है। याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट में वकील सुनीता तिवारी ने याचिका दायर कर इस प्रथा पर रोक लगाने की मांग की है। 

सोमवार को सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि महिला सिर्फ पति की पसंदीदा बनने के लिए ऐसा क्यों करे? क्या वो पालतू भेड़ बकरियां है? उसकी भी अपनी पहचान है।कोर्ट ने कहा कि ये व्यवस्था भले ही धार्मिक हो, लेकिन पहली नज़र में महिलाओं की गरिमा के खिलाफ नज़र आती है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी के प्राइवेट पार्ट को छूना पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध है। कोर्ट ने आगे कहा कि खतना पूरी तरह से जुर्म है और कोर्ट इस पर रोक का समर्थन करता है। सरकार पहले ही इसको लेकर साल साल की कैद की सजा का ऐलान कर चुकी है।विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। 

केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका का समर्थन करते हुए कहा था कि धर्म की आड़ में लड़कियों का खतना करना जुर्म है और वह इस पर रोक का समर्थन करता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि इसके लिए दंड विधान में सात साल तक कैद की सजा का प्रावधान भी है। 

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