'सुप्रीम' झटका के बाद भी नियोजित शिक्षक संघ लड़ाई रखेगा जारी,कोर्ट में रिव्यू पिटीशन होगा दायर

'सुप्रीम' झटका के बाद भी नियोजित शिक्षक संघ लड़ाई रखेगा जारी,कोर्ट में रिव्यू पिटीशन होगा दायर

पटना- सुप्रीम कोर्ट ने आज बिहार के नियोजित शिक्षकों के समान काम के बदले समान वेतन मामले पर बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को बदलते हुए  बिहार सरकार के पक्ष मे अपना फैसला सुनाया है।सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार के करीब 4 लाख नियोजित शिक्षक स्तब्ध हैं।

शिक्षक संघ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आहत जरूर है लेकिन लड़ाई आगे भी जारी रखने का एलान किया है।माध्यमिक शिक्षक संघ ने कहा है कि समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।संघ एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेगी। संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि वकील से बात हुई है।सुप्रीमकोर्ट के जजमेंट की हमारे वकील समीक्षा कर रहे हैं ।फैसले की समीक्षा के बाद संघ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेगी।

बता दें कि बिहार के नियोजित शिक्षक संघ ने समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को स्थाई शिक्षकों की तरह वेतन दिये जाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने  सुप्रीमकोर्ट में अपील दायर की थी। इसके बाद कोर्ट में लंबी सुनवाई चली। केस की सुनवाई के बाद सुप्रीमकोर्ट ने 3 अक्टूवर 2018 को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। आज कोर्ट ने इस पर अहम फैसला सुनाया है।

सात महीने बाद आने वाले इस फैसले का सीधा असर बिहार के पौने चार लाख शिक्षकों और उनके परिवार वालों पर पड़ेगा। बिहार के नियोजित शिक्षकों का वेतन फिलहाल 22 से 25 हजार है और अगर कोर्ट का फैसला शिक्षकों के पक्ष मे आता तो माना जा रहा था कि उनका वेतन 35-40 हजार रुपए हो जाएगा। शिक्षकों की इस लड़ाई में देश के दिग्गज वकीलों ने उनका पक्ष कोर्ट में रखा। ये लड़ाई 10 साल पुरानी है, जब 2009 में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम समान वेतन की मांग पर एक याचिका पटना हाइकोर्ट में दाखिल की थी।


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