सुशासन की खुली पोल, पारस अस्पताल के खिलाफ जदयू विधायक श्याम रजक की शिकायत पर अबतक नहीं हुई कार्रवाई 

सुशासन की खुली पोल, पारस अस्पताल के खिलाफ जदयू विधायक श्याम रजक की शिकायत पर अबतक नहीं हुई कार्रवाई 

Patna- पटना के पारस अस्पताल के दिए दर्द से पूर्व मंत्री और जेडीयू विधायक श्माम रजक कराहने को मजबूर हैं. लेकिन अपने आप को तेज-तर्रार कहने वाली पटना पुलिस की जांच की गाड़ी आगे नहीं बढ़ पायी है. पुलिस अपने सत्ताधारी विधायक की शिकायत के बाद भी अबतक कोई कार्रवाई नहीं की है. पुलिस अभी सिर्फ जांच और साक्ष्य संग्रह की बात दुहरा रही है.

क्या कहा सचिवालय डीएसपी ने

सचिवालय डीएसपी राजेश प्रभाकर ने बताया कि विधायक श्याम रजक की तरफ से शास्त्रीनगर थाना में मामला दर्ज कराया गया है. मामला दर्ज होते ही पुलिस साक्ष्य संकलन में जुट गई है. इस बिंदु पर भी जांच किया जा रहा है कि विधायक जी के साथ जो घटना हुई है उस समय कौन डॉक्टर उनका इलाज कर रहे थे. जांच में साक्ष्य के आधार पर ही कोई कार्रवाई किया जाएगा.

क्या है मामला

बता दें कि पटना के पारस अस्पताल की स्थिति नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली हो गयी है. अस्पताल मरीजों की जान बचाने के बजाए उनकी जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है. पूर्व मंत्री सह जदयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक भी पारस अस्पताल के डाक्टरों के फेरे में फंस कर पिछले कई दिनों से दर्द से कराहने को मजबूर हैं. अस्पताल के डाक्टरों ने विधायक श्याम रजक की जान के साथ खिलावाड़ किया. इसके बाद विधायक श्याम किसी तरह से वहां से निकलकर दूसरे अस्पताल में ईलाज करा रहे हैं. इसके बाद विधायक श्याम रजक ने पारस अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ राजधानी के शास्त्रीनगर थाने में केस दर्ज कराया था.

दरअसल विधायक श्याम रजक कंधे और पीठ में दर्द की वजह से तीन दिन पहले पारस अस्पताल में भर्ती हुए थे. विधायक ने कहा है कि फिजियोथेरेपी के दौरान अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से सेंकने के दौरान हमारी पीठ को जला दिया गया. जिस वजह से उनकी पीठ में फोड़े हो गए और असहनीय दर्द और जलन होने लगा. विधायक ने कहा कि इसके बाद हमने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की. हद तो तब हो गयी जब पारस अस्पताल के प्रबंधन ने इस गंभीर सवाल पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया. विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह अस्पताल का गैरजिम्मेदाराना रवैया है. इसके बाद विधायक श्याम रजक ने पारस अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शास्त्रीनगर थाने में केस दर्ज करा दिया है. अब मामला पुलिस के हाथ में चला गया है. हाईप्रोफाइल मामला होने की वजह से शास्त्रीनगर पुलिस फुक-फुक कर चल रही है. हालांकि पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है. 

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