हाथरस की घटना पर राजनीति करने वाले बतायें, बलात्कारी राजबल्लभ से अकेले में क्यों मिले थे लालू ?

हाथरस की घटना पर राजनीति करने वाले बतायें, बलात्कारी राजबल्लभ से अकेले में क्यों मिले थे लालू ?

PATNA: हाथरस की घटना पर बिहार में राजनीति तेज है। राजद ने इस घटना पर बीजेपी सरकार को लपेटे में लिया है।इसके जवाब में सुशील मोदी मैदान में उतरे।उन्होंने लालू परिवार पर अटैक करते हुए कहा कि हाथरस की घटना पर राजनीति करने वाले बतायें, बलात्कारी राजबल्लभ से अकेले में क्यों मिले थे लालू ?

सुशील मोदी ने कहा कि, हाथरस की एक बेटी के साथ गैंगरेप और पीड़िता की मृत्यु की दुखद घटना के बाद यूपी सरकार ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया, पीड़ित परिवार को तुरंत 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी और सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया।राजद यदि इस पर राजनीति करना चाहता है, तो बताये कि उसने नवादा की छात्रा से बलात्कार के मामले में दोषी तत्कालीन विधायक राजबल्लभ यादव को बचाने की कोशिश क्यों की थी? अभियुक्त राजबल्लभ से लालू प्रसाद ने अकेले में क्या बात की थी? 

 राजद के जिस विधायक अरुण यादव ने कालाधन छिपाने के लिए एक दिन में राबड़ी देवी के 8 फ्लैट खरीदे, उन्हें बलात्कार के मामले में गिरफ्तारी से कौन बचा रहा है? हाथरस की घटना से भाजपा या योगी सरकार का कोई संबंध नहीं, जबकि बिहार में बलात्कार की दो घटनाओं में राजद विधायक दोषी या अभियुक्त हैं।यूपी में जंगलराज नहीं, योगी राज है। 

सुशील मोदी ने अपने अगले ट्वीट में कहा है कि अयोध्या मामले में आडवाणी सहित सभी नेताओं को बरी करने का फैसला सत्य की विजय है।कोर्ट ने षड्यंत्र की दलील खारिज किया है।सीबीआई की विशेष अदालत ने अयोध्या का  विवादास्पद ढांचा गिराने की घटना में लाल कृष्ण आडवाणी सहित सभी 32 आरोपियों को बरी करने का जो फैसला सुनाया, वह सत्य की विजय है। हम इसका स्वागत करते हैं। न्यायालय ने हमारे इस कथन को सही माना कि घटना सुनियोजित नहीं, बल्कि स्वत:स्फूर्त और आवेशित कारसेवकों की भीड़ के एक वर्ग के गुस्से का परिणाम थी। राम मंदिर निर्माण के लिए जब भूमिपूजन हो चुका है, तब मंदिर आंदोलन के शीर्ष  नेताओं का आरोपमुक्त होना  करोड़ों रामभक्तों को संतोष देने वाला है। 

ऐतिहासिक राम मंदिर आंदोलन के सहभागी और 6 दिसम्बर की घटना का प्रत्यक्षदर्शी होने के नाते मैं कह सकता हूँ कि उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने  कारसेवकों को संयम बरतने की कितनी मार्मिक अपीलें लगातार कीं, लेकिन भीड़ अनियंत्रित रही। जो लोग इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें न  न्यायपालिका पर भरोसा है, न वे वोट बैंक की राजनीति को छोड़ना चाहते हैं। 

 

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