अमेरिका से लाये गए बहुमूल्य दस्तावेज अभिलेखागार को सौंपे गए, सुशील मोदी बोले- जमींदारों के खिलाफ संघर्ष किया स्वामी सहजानंद सरस्वती ने

अमेरिका से लाये गए बहुमूल्य दस्तावेज अभिलेखागार को सौंपे गए, सुशील मोदी बोले- जमींदारों के खिलाफ संघर्ष किया स्वामी सहजानंद सरस्वती ने

PATNA : बिहार राज्य अभिलेखागार में आज अमेरिका से लाये स्वामी सहजानंद सरस्वती से जुड़े दस्तावेज़ों को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की उपस्थिति में सौंपा गया। अभिलेखागार के ये बहुमूल्य दस्तावेज़ 50-60 के दशक में अमेरिका में स्वामी सहजानंद सरस्वती पर काम करने वाले वाल्टर हाउज़र द्वारा ले जाया गया था। सीताराम ट्रस्ट, बिहटा के सचिव डॉ. सत्यजीत सिंह और कैलाश चन्द्र झा के सहयोग से अमेरिका से लाया गया। 

स्वागत वक्तव्य डॉ सत्यजीत सिंह ने दिया। प्रारंभिक वक्तव्य में कैलाश चन्द्र ने उन परिस्थितियों से लोगों को अवगत कराया जिनमें ये दस्तावेजों  को लाया गया। उन्होंने धरोहरों के संरक्षण खासकर इनसाइक्लोपीडिया मुंडारिका,  गवर्नमेंट प्रेस गुलज़ार बाग प्रेस, डिस्ट्रिक्ट रिकार्ड रम, विलेज नोट्स आदि की चर्चा और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमने  अपनी ही चीजों का संरक्षण  नहीं किया और अब दूसरे लोग छाप कर बेच रहे हैं। अभी भी बहुत सारे चीजें हमारे पास हैं जिनको सहेजने व संरक्षित करने की जरूरत है। 

समारोह के मुख्य वक्ता उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि चिंताहरण सिंह  भले कम्युनिस्ट पार्टी के थे लेकिन मैं  उनकी सरलता, विचारधारा के प्रति  उनके समर्पण के कारण उनलोगों को पसंद  करता था। मेरा पूरा इलाका कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव में था। तब कम्युनिस्ट पार्टी का   बड़ा नेता भी बूथ पर रहा करता था।   मतदान केंद्र पर खड़ा होना कोई   सामान्य बात न थी। मैं पूरे परिवार को जिसका पूरे बिहार में उनका स्थान है। पहले पटना के जितने विधायक थे सभी राजेंद्र नगर के थे। डॉ ए.के सेन जैसा कम्युनिस्ट डॉक्टर मात्र दो रुपये में इलाज किया करते थे। मैं आर.एस. एस था लेकिन कम्युनिस्टों से वाद विवाद हुआ करते थे।

 सुशील कुमार मोदी ने वाल्टर हाउज़र  का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के शायद ही किसी विद्वान ने  स्वामी जी पर काम किया जितना वाल्टर हाउज़र ने जिया। स्वामी सहजानांद सरस्वती ने खेतिहर मजदूर के लिए काम किया । बाद में बिहार जमींदारी उन्मूलन वाला राज्य बना। स्वामी सहजानांद सरस्वती ने अपने ही समाज से आने वाले अपनी ही जाति के जमींदारों के खिलाफ संघर्ष किया। ये उनके ही प्रयासों का फल है कि बिहार ने जमींदारी उन्मूलन करने वाला पहला राज्य बना। बाद में नेहरू ने संविधान संशोधन किया ताकि ज़मींदारों द्वारा उसे कोर्ट में चुनौती न दिया जा सके।  सुशील कुमार मोदी ने स्वामी सहजानंद सरस्वती की कई पुस्तकों का जिक्र किया।

समारोह को मंत्रीमंडल सचिवालय के प्रधान सचिव संजय कुमार, डॉ फणीश सिंह, डॉ रंजीत, पूर्व विधान पार्षद रमेश प्रसाद सिंह, अभिलेखागार के प्रभारी निदेशक डॉ महेंद्र पाल ने भी संबोधित किया।

इस मौके पर बड़ी संख्या में  पटना के नागरिक उपस्थित थे। प्रमुख लोगों में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री नवल किशोर चौधरी,  बुजर्ग चन्द्रप्रकाश सिंह, डॉ अनिल,  ' पटना खोया हुआ शहर ' के   लेखक, अरुण सिंह, समान कुमार सिंह, जगजीवन राम शोध व संसदीय अध्ययन संस्थान श्रीकांत,  टाटा   इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज के   चेयरर्सन पुष्पेंद्र, इसक्फ के रवींद्र नाथ राय, सौम्या, श्वेतलाना, डॉ विभा सिंह, आभा झा, शैलेन्द्र मिश्रा, राकेश राज, योगेंद्र प्रसाद सिंह , विनीत राय, जयप्रकाश,  अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव अशोक कुमार,  ज्ञानचन्द्र भारद्वाज, मदन कुमार सिंह आदि  मौजूद थे। 

समारोह के अंत में बिहटा में बनने वाले अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे को स्वामी सहजानन्द सरस्वती के नाम पर करने की मांग की गई।धन्यवाद ज्ञापन डॉ कर्नल ए.के सिंह ने किया।

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