बिहार के 89 डीएसपी रैंक के अधिकारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, जानिए क्या है मामला....

बिहार के 89 डीएसपी रैंक के अधिकारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, जानिए क्या है मामला....

PATNA : एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों का अनुसंधान 60 दिनों में पूरा करने का प्रावधान है, लेकिन समय से सुपरविजन नहीं होने के चलते मामले लंबित हो जाते हैं। कमजोर वर्ग की जिम्मेदारी एससी-एसटी समेत अन्य कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों को देखना है। 

एससी-एसटी समेत अन्य कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में सुपरवीजन में लेटलतीफी किये जाने मामला सामने आया है। मामला सामने आने के बाद फील्ड में तैनात डीएसपी रैंक के 89 अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही बताया जा रहा है कि एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में इनके द्वारा सुपरविजन में विलंब किया गया।

जिन 89 डीएसपी रैंक के अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है इनमें से अधिकतर एसडीपीओ के पद पर तैनात हैं। मामले के संज्ञान में आने के बाद आईजी कमजोर वर्ग डॉ. कमल किशोर सिंह ने डीएसपी रैंक के इन अधिकारियों से जवाब तलब किया है। उनसे पूछा गया है कि आखिर सुपरविजन में विलंब क्यों हुआ।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कई मामलों की समीक्षा के दौरान पाया गया कि सुपरविजन की वजह से अनुसंधान पूरा नहीं हो पाया है या देर से हुआ। राज्य के विभिन्न अनुमंडलों में तैनात डीएसपी रैंक के अफसरों ने एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज कई मामलों का सुपरविजन 60 दिनों तक किया ही नहीं था। इसके द्वारा सुपरविजन में इससे ज्यादा का वक्त लिया गया, जबकि 60 दिनों में अनुसंधान पूरा करना होता है।

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