सहयोगी दलों को खुद के सामने झुकाना चाहते हैं तेजस्वी, RJD ने चल दी नई चाल, हर मुद्दे पर इंकलाब लेकिन सीट बंटवारे के लिए फुर्सत नहीं

सहयोगी दलों को खुद के सामने झुकाना चाहते हैं तेजस्वी, RJD ने चल दी नई चाल, हर मुद्दे पर इंकलाब लेकिन सीट बंटवारे के लिए फुर्सत नहीं

पटना : बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारी तेज हो गई है. सभी पार्टियां चुनावी मैदान में उतरने के लिए खुद को मजबूत करने में जुटी हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव नीतीश सरकार को घेरने के लिए पूरी ताकत के साथ फिल्ड में उतर आए हैं लेकिन सबसे ताज्जुब की बात यह है कि तेजस्वी यादव चुनाव की तैयारी को लेकर हर काम कर रहे हैं लेकिन महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कोई इंटरेस्ट नहीं दिखा रहे हैं.

सहयोगी दलों को नहीं दे रहे वेट
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बिहार के हर राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरी नजर बनाए हुए हैं. वो नीतीश सरकार के खिलाफ जाने वाले हर मुद्दों को लपक रहे हैं, चाहे वो बाढ़ का हो या फिर कोरोना से जुड़ा मुद्दा. तेजस्वी यादव लगातार इन मुद्दों को लेकर आक्रमक हैं और सरकार पर हमला कर रहे हैं.लेकिन इन सब के बीच तेजस्वी ने अपने सहयोगी दलों से दूरी बना ली है. आखिर क्या वजह है कि तेजस्वी यादव सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार पर हमला नहीं कर रहे हैं. हालिया के राजनीतिक घटना क्रम को देखा जाए तो इससे साफ है कि तेजस्वी यादव खुद लीड लेकर बिहार के विपक्ष की सियासत में अपना अकेला वजूद साबित करने चाह रहे हैं. तेजस्वी यादव के इस रुख से मांझी की परेशाना तो सबके सामने है ही लेकिन कुशवाहा और सहनी भी कम बेचैन नहीं हैं.

हर मुद्दे पर इंकलाब है लेकिन सीट बंटवारे के लिए फुर्सत नहीं
महागठबंधन में सीट बंटवारे के मुद्दे पर आपस में बात-मुलाकात करने के लिए तेजस्वी के पास फुर्सत नहीं है. बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में तेजी से बदलते घटनाक्रम और राजद की बेरूखी से घटक दल हैरान-परेशान और बेचैन हैं. जैसे-जैसे चुनाव का समय करीब आते जा रहा है, वैसे-वैसे उनकी उलझन बढ़ती जा रही है.

 स्टैंड लेने में जुटी कांग्रेस
सीट बंटवारे को लेकर तेजस्वी के रुख को देखने के बाद कांग्रेस पार्टी भी स्टैंड लेने के मूड में दिख रही है.कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल बिहार दौरे पर आए थे. उन्हें पटना में तीन दिन रहकर आरजेडी के साथ सीट बंटवारे का मसला सुलझाना था, किंतु अपने ही दल के कुछ वरिष्ठ नेताओं से मिलकर गोहिल भी लौट गए. अन्य किसी दल के नेताओं से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी. हवाला दिया गया कि सभी नेता दिल्ली में है. लेकिन तेजस्वी पटना में ही मौजूद थे लेकिन तेजस्वी से भी गोहिल की मुलाकात नहीं हो पाई. राजनीतिक जानकार यह बताते हैं तेजस्वी यादव नई चाल चल रहे हैं ताकि सीट बंटवारे के वक्त सहयोगी दलों को प्रेशर बनाने का मौका न मिले और यह तह हो जाए कि चुनाव तो तेजस्वी के नेतृत्व में ही लड़ना है.

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