नीतीश कैबिनेट में “दागदार” नेताओं की इंट्री तेजस्वी की बिगाड़ सकती है यूएसपी, सुशासन को लग सकता है जोरदार झटका

नीतीश कैबिनेट में “दागदार” नेताओं की इंट्री तेजस्वी की बिगाड़ सकती है यूएसपी, सुशासन को लग सकता है जोरदार झटका

PATNA : पिछले दिनों मचे सियासी भूचाल के बाद बिहार में अब सत्ता का परिवर्तन हो चुका है। बीजेपी का साथ छोड़कर नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बना चुके हैं। उनके साथ जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा भी सरकार में शामिल हो गयी। इस राजनीतिक उठा पटक के बीच राजभवन में आयोजित समारोह नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। कल यानी 16 अगस्त को नीतीश कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। जिसमें महागठबंधन में शामिल दलों के नेता मंत्री पद की शपथ लेंगे। हालाँकि कल होने वाले शपथ समारोह में किसे मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। इसका अभीतक खुलासा नहीं हो पाया है। लेकिन संभावना जताई जा रही है की जदयू के उन नेताओं को फिर से मौका दिया जाएगा। जो पिछली सरकार में मंत्री रह चुके हैं। 


बात नयी सरकार में शामिल राष्ट्रीय जनता दल की करें तो कल शपथ लेनेवाले लोगो की लिस्ट फाइनल हो चुकी है। लेकिन सार्वजनिक रूप से इसे भी जाहिर नहीं किया गया है। हालाँकि संभावना जताई जा रही है की मंत्रिमंडल में ललित यादव और सुरेन्द्र प्रसाद यादव जैसे नेताओं को जगह दी सकती हैं। लेकिन राजद के दोनों विधायक दबंग छवि के माने जाते हैं। जिनपर पूर्व में कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। यदि दागदार विधायक महागठबंधन की सरकार में मंत्री बनते हैं तो तेजस्वी यादव की राजनीति पर इसका काफी असर पड़ सकता है। पहले से ही लोग राजद की सरकार में ‘जंगलराज’ से आशंकित रहते हैं। दागदार नेताओं के मंत्री बनने के बाद हाईकोर्ट के जंगलराज की टिप्पणी को फिर से बल मिलेगा। 

बात ललित यादव की करें तो वे दरभंगा ग्रामीण से छठी बार विधायक चुनकर आये हैं। लेकिन 2016 में दरभंगा के मब्बी ओपी के शाहपुर चक्का गांव निवासी प्रॉपर्टी डीलर हीरा पासवान का शव उसके बगीचे में मिला था। उसकी गोली मारकर हत्या की गई थी। हत्याकांड की प्राथमिकी में ललित यादव का नाम नहीं होने के बावजूद मृतक के परिजनों द्वारा बाद में नाम लिए जाने पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। परिजनों ने विधायक के इशारे पर ही हत्या का आरोप लगाया था। वहीँ राबड़ी सरकार में सहकारिता मंत्री रहे ललित यादव वर्ष 2000 में अपने सरकारी आवास में एक ट्रक चालक व खलासी को एक महीने तक बंद रखने के आरोपी रहे हैं। मामला सामने आने पर वे मंत्रिमंडल से हटा दिए गए थे। तब इसे लेकर खूब हंगामा मचा था। बाद में उन्हें राजद की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित कर दिया गया था। 

वहीँ सात बार बेलागंज विधानसभा सीट के विधायक और लोकसभा सांसद रहे सुरेंद्र प्रसाद यादव आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के काफी करीबी माने जाते हैं। उनपर  तीन दर्जन से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें हत्या से प्रयास, आपराधिक साजिश से लेकर दंगे तक शामिल हैं। गौरतलब है की 1998 में सुरेंद्र यादव जहानाबाद लोकसभा सीट से 13 महीने तक सांसद रहे। इस दौरान उनकी एक हरकत को आज मीडिया में उस समय जरुर दिखाया जाता है। जब लोकसभा में कोई अशोभनीय मामले सामने आते हो। इसे भारतीय संसद के इतिहास में बदनुमा दाग माना जाता है। उन्होंने सदन में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के हाथों से महिला आरक्षण बिल की कॉपी लेकर फाड़ दी थी। लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने सांसद बनने के लिए कई बार कोशिशें कीं। लेकिन दोबारा लोकसभा नहीं पहुंच पाए।

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