द्रौपदी मुर्मू पर विवादित बयान देकर जदयू-बीजेपी के निशाने पर आए तेजस्वी यादव, कहा- दलितों को लेकर सामने आ गई उनकी मानसिकता

द्रौपदी मुर्मू पर विवादित बयान देकर जदयू-बीजेपी के निशाने पर आए तेजस्वी यादव, कहा- दलितों को लेकर सामने आ गई उनकी मानसिकता

PATNA : देश की अगली राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मू का नाम लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन विपक्ष अब भी उन्हें एक ऐसी उम्मीदवार के तौर पर देख रही है, जो कि मोदी सरकार के कठपुतली के रूप में काम करेगी। यही कारण है कि बिहार के नेता प्रतिपक्ष ने बीते शनिवार को द्रौपदी मुर्मू को लेकर एक विवादित बयान दे दिया। तेजस्वी ने एनडीए की राष्ट्रपति प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू का नाम लिए बगैर उनकी मूर्ति से तुलना की। कहा कि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति को बिठाना है, न कि किसी मूर्ति को। तेजस्वी ने कहा कि एनडीए प्रत्याशी को किसी ने प्रेस कान्फ्रेंस करते नहीं देखा-सुना है। तेजस्वी ने कहा कि विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को तो सभी ने बोलते हुए सुना होगा।  अब इस बयान को लेकर तेजस्वी भाजपा और जदयू के निशाने पर आ गए हैं। दोनों पार्टियों ने सीधे सीधे तेजस्वी यादव को दलित विरोधी बता दिया है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा - पहले अपने परिवार में देखें

द्रौपदी मुर्मू को लेकर दिए गए बयान को लेकर भाजपा प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि इस तरह के बयान देकर तेजस्वी यादव ने बता दिया है कि उनकी दलितों के प्रति किस तरह की सोच है। एक महिला जो समाज के सबसे निचले तबके से उठकर मेहनत से विधायक बनी, राज्यपाल बनी, अब देश के सबसे बड़े पद की जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। उनके लिए इस तरह की बातें सिर्फ तेजस्वी यादव ही कर सकते हैं। अरविंद सिंह  ने कहा कि जिस व्यक्ति की मां राज्य की मुख्यमंत्री रहीं हैं, उनकी शिक्षा कैसी है, खुद तेजस्वी यादव की शिक्षा कैसी यह सभी जानते हैं। वह खुद एक पन्ने का लिखा हुआ भाषण भी ठीक तरीके से नहीं पढ़ पाए। जिस परिवार की भाषा ही असंसदीय है, उनसे और कुछ उम्मीद भी नहीं की जा सकती है। 

जदयू ने कहा - अपने गिरेबां में झांके

वहीं, जदयू ने भी तेजस्वी यादव  और राजद को अपने गिरेबां में झांकने की नसीहत दी है।प्रवक्ता अरविंद निषाद ने कहा कि वह लोहिया की बात करते हैं, लेकिन राम मनोहर लोहिया, जो कि संपूर्ण महिलाओं की तुलना पिछड़ो से करते थे और उन्हें समाज में उनका हक दिलाने की कोशिश की थी। आज एनडीए उन सपनों को पूरा करने जा रहा है तो राजद को यह पसंद नही आ रहा है। वह लोहिया को सपनों को पूरा होते नहीं देखना चाहते हैं।

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