लाख गोल-माल, झोल-झाल के बाद भी नहीं छुप रही प्रदेश में कोरोना संक्रमण की सच्चाई, नीतीश जी हैं सदमें में : तेजस्वी यादव

लाख गोल-माल, झोल-झाल के बाद भी नहीं छुप रही प्रदेश में कोरोना संक्रमण की सच्चाई, नीतीश जी हैं सदमें में : तेजस्वी यादव

Patna : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर नीतीश सरकार पर बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि कोरोना को लेकर राज्य सरकार द्वारा किये जा आंकड़े के गोलमाल और झोलझाल के बाद भी सच्चाई सामने आ जा रही है। जिसकी वजह से सीएम नीतीश कुमार सदमें में है। 

तेजस्वी ने आज प्रेस-वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान कोरोना के बहाने वे नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधे। उन्होंने कहा कि कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेरे द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और आंकड़ों से मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को इतनी बेचैनी और पीड़ा पहुंची कि शाम में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को आनन फानन में प्रेस कांफ्रेंस इस सच्चाई पर पर्दा डालने और लीपा-पोती करनी पड़ी।

साकारात्मक जवाब देने पर आग-बबूला हो जाते है स्वास्थ्य मंत्री

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री का खीझ और झुंझलाहट से ही पता चल गया कि कोरोना को लेकर उनकी तैयारी क्या है। कोई भी व्यक्ति गुस्सा या झुंझलाहट में कब आता है ये आप सभी लोगो को भली-भांति मालूम होगा। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार विपक्ष के नाते मेरा कर्तव्य बनता है की सरकार की कमियों और खामियों को उजागर करूँ और जनहित के मुद्दों पर सवाल करूँ| चूँकि कोरोना एक ऐसी स्वास्थ्य संकट है जिससे हमारे साढ़े बारह करोड़ बिहारी भाई-बहन सीधे तौर पर खतरे में हैं और उनकी जिंदगी दावं पर लगी है। मैं स्वाभिक रूप से चुप नहीं बैठ सकता और सरकार को भी चुप्पी साध सोने नहीं दूंगा| एक तरफ स्वास्थ्य मंत्री चिठ्ठी लिख कर सुझाव मांगते हैं और जब हम सकारत्मक सुझाव देते हैं तो उस पर आग-बबूला हो जाते।

हालात से सदमें है सीएम 

तेजस्वी यादव ने कहा कि कोरोना का संक्रमण बहुत तेजी से फ़ैल रहा और स्थिति वाकई चिंताजनक है| जिस प्रकार नीतीश कुमार का "कानून अपना काम करता है " उसी राह पर "कोरोना भी अपना काम कर रहा है " कल कोरोना कुल मरीजों की संख्या एक लाख और मृत्यु की संख्या 500 हो जाएगी| वर्तमान डॉबलिंग रेट के अनुसार इस महीने के आखिर तक दो लाख मरीज हो जायेंगे| नीतीश जी के शब्दों में अगर कहें तो कोरोना न किसी को बचाता है और न ही किसी को फंसाता है| लाख गोल-माल ,झोल-झाल के बावजूद कोरोना संक्रमण की सच्चाई छुप नहीं पा रही और इसी वजह से नीतीश जी सदमें में हैं |

उन्होंने कहा कि अब अगर तथ्यों की बात करें तो मैंने मंगल पांडेय जी के वक्तव्य को ही दोहराया है और इसके प्रमाण  के लिए मैं उनके ही विभाग द्वारा जारी 2 अगस्त की  कोविड बुलेटिन आपके समक्ष पेश कर रहा हूँ।  02 -08 -20 तक कुल 612415 जाँच हुए थे जिसमें RT -PCR जाँच 324000 हुए जो की 52. 9 % हुआ ,उसी प्रकार 110000  TrueNat   जाँच हुए जो की 17. 9 % हुआ और 178000 एंटीजन टेस्ट हुए जो की 29 % हुआ | अब आप ही बताईये मैंने क्या गलत बोला, फैक्ट को as it is यथावत रखने से कौन सा भ्रम पैदा हुआ ?

तेजस्वी ने कहा कि सीएम नीतीश जी ने 11 अगस्त को  प्रधानमंत्री जी से 6100 RT -PCR टेस्ट होने की बात कही थी और उन्होंने संभवतः 10 अगस्त का ही आंकड़ा बताया होगा| उस दिन के बुलेटिन के अनुसार 75346 जाँच हुए थे जो की मात्र 8 प्रतिशत हुआ| अब आप बताएं मैंने कौन सा गलत तथ्य पेश किया ? कल प्रेस कांफ्रेंस में  स्वास्थ्य मंत्री ने खुद माना कि बिहार की RT -PCR और TrueNat मिलाकर जाँच क्षमता मात्र  साढ़े दस हजार (10500) की है | आप खुद तय करें कौन भ्रम फ़ैलाने का काम कर रहा

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सभी को मालूम है कि कोरोना मरीज को सबसे ज्यादा साँस लेने में दिक्कत होती है , इसलिए इलाज में ऑक्सीजन सप्लाई की सबसे ज्यादा जरुरत होती है | मैंने सरकार से एक लाख ऑक्सीजन युक्त बेड्स तैयार करने की मांग की। अब इसमें क्या भ्रामक है? क्या अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग करना भ्रामक है? 13-08 -20 तक 31467 एक्टिव cases हैं और पुरे बिहार में मात्र 10 हज़ार 482 ऑक्सीजन युक्त बेड्स उपलब्ध हैं। यह खुद सीएम अपने प्रेस रिलीज़ में बोल रहे| साढ़े बारह करोड़ आबादी के लिए मात्र 10482 ऑक्सीजन युक्त बेड्स, इसीलिए मैं कहता हूँ की बिहार में सबकुछ भगवान् भरोसे है| मैं पूछना चाहता हूँ की आखिर पांच महीनों में सरकार ने क्या किया ? बाकी राज्यों  ने testing capacity और hospital की capacity कैसे बढ़ा लिया और बिहार अभी तक कछुए की चाल चलते हुए फिसड्डी हो गया ?

बिहार की हालत ये है की जब जांच की जरुरत 10 हजार थी तो बमुश्किल 1 हज़ार  भी नहीं हो पाता था। वहीं जब 50 हजार की जरुरत थी तो 5 हजार नहीं हो पाया और आज जब 1 लाख की जरुरत है तो RT -PCR  6100 खिंचतान कर हो पा रहा है। इतनी दयनीय स्थिति मैं समझता हूँ किसी भी राज्य में नहीं है और किसी से छुपा भी नहीं है। बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर न स्वास्थ्य है और न ही कोई व्यवस्था , सब मरणासन्न स्थिति में है|

उन्होंने कहा क स्वास्थ्य मंत्री से मेरी अपेक्षा थी कि वो मेरे द्वारा दिए गए सुझावों पर बोलते ,मेरे द्वारा पूछे गए सवालों का facts के साथ जवाब देते लेकिन उन्होंने इन मुद्दों पर कुछ नहीं बोला | मैं आज फिर उनसे पूछना चाहता हूँ जिस COVAS -8800 की खरीद की बात आप कर रहें ,उसकी खरीद 5 महीने हो गए अभी तक क्यों नहीं की गयी ? 24 जून को परचेज आर्डर (PO) को क्यों कैंसिल करना पड़ा ? हेल्थ इमरजेंसी में तत्परता दिखानी चाहिए तो आप और आपके मुख्यमंत्री बंगले  में बंद हैं | आखिर संक्रमण का फैलाव क्यों नहीं रुक रहा ? आखिर अभी तक पर्याप्त oxygen concentrator और ventilator की खरीद क्यों नहीं की गयी ? आपलोगों का जो धीमा  approach है,हर मोड़ पर यही कहना पड़ेगा की "अब पछताय होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत "

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