तेजप्रताप से क्यूं भड़कते हैं आरजेडी के बड़े नेता? तेजस्वी के चहेते होने की वजह जानिए...

PATNA : आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को लेकर तेजप्रताप यादव का गुस्सा एक बार फिर से सातवें आसमान पर है। तेजप्रताप का आरोप है कि रामचंद्र पूर्वे ने उन्हें पार्टी कार्यालय में जाने से रोका है। तेजप्रताप जब पहली बार मुखर हुए थे तब भी उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पर उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाया था। तेजप्रताप यादव पिछले कुछ वक्त से पार्टी कार्यालय में जनता की समस्या सुनने के लिए दरबार लगा रहे हैं लेकिन उनके इस दरबार में कभी भी पार्टी का कोई बड़ा नेता उनके साथ मौजूद नहीं रहा है। इसके ठीक उलट तेजस्वी यादव के आवास से लेकर हर बैठक में नेताओं का जमघट लगा रहता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि तेजप्रताप से उनकी ही पार्टी के बड़े नेता आखिर क्यूँ भड़कते है? 

तेजप्रताप के तेवर से बनी दूरी

आरजेडी के अंदर दबी जुबान से हर कोई यह कहता है कि तेजप्रताप से पार्टी के बड़े नेताओं की दूरी के लिए खुद उनका ही कड़ा और अप्रत्याशित तेवर जिम्मेवार है। तेजप्रताप कब किसे..  क्या कह दें यह कोई नहीं जानता। ऐसे में आरजेडी के बड़े नेता खुद को तेजप्रताप के सामने असहज महसूस करते हैं। तेजप्रताप के साथ रहते हुए किसी असहज स्थिति का सामना नहीं करना पड़े इसलिए उनसे दूरी बनाए रखना ही ज्यादातर नेता बेहतर समझते हैं। 

तेजस्वी का व्यक्तित्व है उलट

उम्र में छोटा होने के बावजूद तेजस्वी यादव बड़े भाई तेजप्रताप यादव से बिल्कुल उलट हैं। तेजस्वी की भाषा से लेकर बॉडी लैंग्वेज तक में एक शॉफ्टनेस है। तेजस्वी पार्टी के बड़े नेताओं को ना केवल पूरा सम्मान देते हैं बल्कि उनकी बात को संयम के साथ सुनते भी हैं। यह तेजस्वी का व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली ही है कि पार्टी के पुराने दिग्गज में उनसे मिलने जाने संकोच नहीं करते। सबसे बड़ी बात यह भी है कि तेजस्वी के रूप में सबको पार्टी का भविष्य दिखता है। बड़े और छोटे भाई के बीच का यह अंतर भले ही उनकी राजनीति के शुरुआती दिनों में साफ तौर पर ना दिखा हो लेकिन अब वह दिखने भी लगा है और असर भी डाल रहा है।


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