तेजस्वी के बंगला पर अब सरकार में हीं तकरार, सुशील मोदी ने सीएम नीतीश के प्रधान सचिव को ले लिया निशाने पर!

तेजस्वी के बंगला पर  अब सरकार में हीं तकरार, सुशील मोदी ने सीएम नीतीश के प्रधान सचिव को ले लिया निशाने पर!

पटनाः बिहार में तेजस्वी के बंगले पर तकरार जारी है।शुक्रवार को भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव ने तेजस्वी यादव के बंगले पर हुई फिजूलखर्ची को सिरे से खारिज कर दिया था।विभाग के प्रधान सचिव चंचल कुमार ने साफ कहा था कि बंगले पर कोई अपव्यय नहीं हुआ है।उस बंगले पर जो भी खर्च हुआ वह पूरी तरह से नियम सम्मत था।उन्होंने तो यहां तक कहा था कि डिप्टी सीएम के बंगले पर हुई खर्च पर कोई जांच नहीं बिठायी गयी थी।उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि जब कोई गड़बड़ी हीं नहीं हुई तो फिर जांच  का क्या मतलब। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए डिप्टी सीएम सुशील मोदी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

 इसके बाद आज उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि 5 देशरत्न मार्ग स्थित बंगले के साज-सज्जा पर अपने पद का दुरूपयोग कर करोड़ों खर्च कराने के मामले में तेजस्वी यादव को सरकार ने काई क्लीनचिट नहीं दी है। आखिर किस नियम के तहत तेजस्वी यादव ने भवन निर्माण विभाग के अतिरिक्त पुल निर्माण निगम से 59 लाख का कीमती फर्नीचर मंगवाया। 

मोदी ने कहा कि आखिर तेजस्वी यादव ने किस प्रावधान के तहत केवल कमरे में ही नहीं बल्कि शौचालय तक में 44 एसी लगवाए, 35 महंगे लेदर सोफा, विदेशी ग्रेनाइड/मार्बल, दीवारों की वूडेन पैनलिंग और फर्श पर वूडेन फ्लोरिंग, किचेन 464 महंगी फैंसी एलईडी लाईट, 108 पंखा, लाखों का बिलियडर्स टेबुल, व कीमती पर्दे आदि पर अनाप-शनाप सरकारी धन खर्च कराया।

तेजस्वी यादव की अपव्ययिता, फिजूलखर्ची व बंगले की 7 स्टार वाली साज-सज्जा के बाद ही तो भवन निर्माण विभाग को नया गाइडलाइन जारी करना पड़ा है ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति तेजस्वी की तरह सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं कर सके।  

अगर तेजस्वी यादव ने अपने पद का दुरुपयोग और फिजूलखर्जी कर बंगले पर कब्जा नहीं जमाया होता तो सुप्रीम कोर्ट को 50 हजार रुपये का दंड लगा कर उन्हें बंगला खाली करने के लिए बाध्य नहीं करना पड़ता।

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