बिना निविदा के उपायुक्त आवास में कार्य पूरा, राशि के भुगतान के लिए निकाला गया टेंडर

बिना निविदा के उपायुक्त आवास में कार्य पूरा, राशि के भुगतान के लिए निकाला गया टेंडर

BOKARO : बोकारो उपायुक्त के आवास में गाय के लिए शेड और पाथ-वे सहित अन्य काम के लिए भवन प्रमंडल की निविदा कोई ठेकेदार नही डालें तो हीं बेहतर है. जिस काम का टेंडर निकाला गया है, वह काम 2018 में ही पूरा हो चुका है. केवल सेटिंग से काम करने वाले  ठेकेदार को भुगतान करने के लिए यह टेंडर निकाला गया है. यदि कोई अलग व्यक्ति टेंडर पेपर खरीद लेता है तो विभाग उसकी निविदा को किसी न किसी बहाने रद्द कर देगा.

यह बोकारो के भवन प्रमंडल विभाग के काम करने का स्टाइल है. पहले चहेते ठेकेदार से काम कराया जाये. इसके बाद लोगों की आंख में धूल झोंकने के लिए टेंडर निकाला गया है.

26 फरवरी 2019 को सचिव से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद भी टेंडर नहीं निकाला गया. इसके लिए समय का इंतजार किया गया. टेंडर निकालने का समय भी अलग से चुना गया. एक उपायुक्त बोकारो से प्रभार देकर बोकारो से जाने की तैयारी में थे. दूसरे प्रभार लेकर अपने शिफ्टिग में लगे थे. इस समय टेंडर इसलिये निकाला ताकि पूरा मामला खुल न जाये. यही वजह है कि 19 अगस्त को उपायुक्त का तबादला हो गया. 21 अगस्त को नये उपायुक्त ने प्रभार ग्रहण किया और वापस अपने सामान लाने के लिए रांची चले गए. निर्वतमान उपायुक्त रांची जाने के लिए सामान पैकिंग कर रहे थे. इसी बीच 22 अगस्त को टेंडर निकाला गया. 

1. 27 सितंबर 2017 को उपायुक्त रॉय महिमापत रे ने पूरा कार्य कराने के बाद नए आवास में गृहप्रवेश किया.

2. 9 फरवरी 2018 को नये उपायुक्त मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने प्रभार लिया.

3. 8 मार्च 2018 को उपायुक्त मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को काम कराने के लिए पत्र भेजा.

4. 22 सितंबर 2018 को उपायुक्त मृत्युंजय बरनवाल काम के पूरा होने का प्रमाण देते हुए भुगतान करने का निर्देश दिया.

5. 29 दिसंबर 2018 को ठेकेदार ने सीधे सचिव को पत्र देकर कार्य की स्वीकृति प्रदान करने की मांग की.

6. 26 फरवरी 2019 को सचिव ने कार्य की स्वीकृति प्रदान की.

7. 22 अगस्त को 2019 को निविदा निकाली गई जिसमें 4 सितंबर तक निविदा खोलने की बात कही गई है.

राज कुमार राणा, कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल बोकारो ने कहा कि कार्य 2018 में ही पूर्ण हो चुका है. प्रशासनिक स्वीकृति ही फरवरी 2019 में मिली. प्रक्रिया को पूर्ण करने के उपरांत ही काम होगा. टेंडर निकाला गया है. जिसने काम किया है अब उसकी जवाबदेही कि कैसे मैनेज करेगा.

बोकारो उपायुक्त निवास स्थान सह गोपनीय शाखा में गोहाल (गाय का रहने वाला स्थान) समेत 11 अन्य काम बिना टेंडर के कार्य पूरा हो गया है. काम के लिए तत्कालीन डीसी मृत्युंजय कुमार वर्णवाल ने कार्यपालक अभियंता ( भवन प्रमंडल ), बोकारो को पत्र (पत्रांक 707) लिखा था. काम करने में 29 लाख रुपया खर्च किया गया था.

कार्य करने वाली कंपनी बिना निविदा के निकासी के लिए फरियाद करने लगी. इसके बाद भवन प्रमंडल विभाग ने किये गये कार्य के लिए दोबारा टेंडर जारी किया, ताकि कार्य करने वाली कंपनी को पिछले दरवाजा से पैसों का भुगतान कर सके. इसके लिए 22 अगस्त और 23 अगस्त को विभिन्न अखबार में टेंडर जारी किया गया है. टेंडर संख्या 13/2019-20 है.

इन कार्यों में किया गया खर्च

पाथ वे, कार्यालय शेड, गोहाल, संतरी पोस्ट निर्माण में 35 लाख 31 हजार 650 रुपया खर्च किया गया. वहीं आवास के रंग-रोगन में 07 लाख 76 हजार 650 रुपया, आरसीसी कवर ड्रेन इंटरनल डेकोरेशन में 21 लाख 65 हजार और लॉन क्षेत्र में ग्रासिंग-रोकरी में 09 लाख 92 हजार 280 रुपया खर्च किया गया.

गड़बड़ी की होगी जांच 

इस मामले पर भवन निर्माण विभाग के सचिव सुनील कुमार ने कहा कि विभाग की तरफ से गाय के रहने के लिए कोई स्वीकृति नहीं दी गयी होगी. स्वीकृति सुरक्षा कारणों से दूसरे निर्माण कार्य के लिए दी गयी होगी. लेकिन मामले की जांच होगी. अधिकारियों से जांच करा कर जो भी दोषी पाये जायेंगे उन पर कार्रवाई होगी.

बोकारो से मृत्युंजय की रिपोर्ट 

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