बिहार में लगातार बढ़ रहा कैंसर का मामला, हर साल गुटखा और तम्बाकू के साथ ही इस वजह से बढ़ रही कैंसर मरीजों की संख्या

बिहार में लगातार बढ़ रहा कैंसर का मामला, हर साल गुटखा और तम्बाकू के साथ ही इस वजह से बढ़ रही कैंसर मरीजों की संख्या

पटना. बिहार में भले तम्बाकू उत्पादों की बिक्री और सेवन करने वालों के खिलाफ सख्त क़ानूनी कार्रवाई करने की बातें की जाती हों और इससे जुड़ा कानून भी है. बावजूद इसके बिहार में तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. उसी अनुरूप तम्बाकू से होने वाली बिमारियों से ग्रसित लोगों की संख्या भी बढ़ रही है. दरअसल, राज्य में मुंह और गॉल ब्‍लाडर का कैंसर के मामलों में जिस कदर की तेजी आई है, उससे यह माना जा रहा है कि इसका एक बड़ा कारण तम्बाकू का सेवन है. एक अनुमान के मुताबिक राज्य में यहां प्रति वर्ष करीब 85 हजार से ज्‍यादा नए कैंसर मरीजों की पहचान हो रही है. इसमें सबसे ज्यादा मुंह और गॉल ब्‍लाडर का कैंसर सामने आया है. 

दरअसल, राज्य में गुटखा और तंबाकू पर बैन के बावजूद बिहार में इनकी बिक्री खुलेआम होनी आम बात है. ऐसे में गुटखा जैसे कारकों से बड़ी संख्या में लोग कैंसर का शिकार हो रहे हैं. आंकड़ों पर गौर करें तो बिहार में मुंह, फेफड़े, आंत नली और गॉल ब्‍लाडर कैंसर का 90 प्रतिशत कारण तंबाकू ही है. अन्‍य 10 फीसदी कारणों में मोटापा समेत अन्‍य कारक है. वर्ष 2018 से 2022 तक के आंकड़े देखें तो मुंह के कैंसर का आंकड़ा भयावह है. बिहार में 16 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आए हैं. 


पुरुषों की तुलना में महिलाओं की बच्‍चेदानी, स्‍तन कैंसर के मामले बढ़े हैं. वहीं पुरुषों में लीवर कैंसर, प्राेस्‍टेट कैंसर बढ़ रहे हैं. इनका बढने का एक बड़ा कारण अशुद्ध खाद्यान को माना जा रहा है. राज्य में आर्सेनिक की बढती मात्रा के कारण ऐसे कैंसर के मामले बढ़े हैं. चिकित्सकों का दावा है कि आर्सेनिक की मात्रा खेतों तक पहुंच रही है. इससे चावल और गेहूं भी प्रभावित हो रहा है. यही खाद्यान जब कोई खाता है तो वह शरीर में चला रहा है. यह कैंसर को बढ़ावा देने का कारण बन जाता है. महिलाओं और पुरुषों पर तम्बाकू के अलावा अन्य कारणों से होने वाले कैंसर का एक बड़ा कारण इस प्रकार का अशुद्ध खाद्यान है. 


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