शादी पर घिरे संकट के बादल तो बीएसएफ बना देवदूत, दुर्जन जगह से 'दूल्हा' को किया एयरलिफ्ट

शादी पर घिरे संकट के बादल तो बीएसएफ बना देवदूत, दुर्जन जगह से 'दूल्हा' को किया एयरलिफ्ट

DESK. संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों या सैन्य जवानों एयरलिफ्ट करके उन्हें सुरक्षित पहुंचाने के कई मामले सामने आते रहते हैं. लेकिन बीएसएफ का विशेष एयरलिफ्ट अब सुर्खियाँ बटोर रहा है जो दुनिया में शायद अपनी किस्म का पहला एयरलिफ्ट है. दरअसल इस एयरलिफ्ट के पीछे न तो किसी की जान बचाने की चुनौती थी और ना ही किसी को संकटग्रस्त इलाके से निकालना. यह एयरलिफ्ट एक विवाह से जुड़ा मसला रहा. 

दरअसल, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) की एक दूरस्थ चौकी पर तैनात एक जवान को एयरलिफ्ट करने के लिए गुरुवार को एक हेलीकॉप्टर की विशेष उड़ान संचालित की, जिससे वह अपनी शादी के लिए 2,500 किलोमीटर दूर ओडिशा में स्थित अपने घर पर समय से पहुंच सके. सीमा सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियंत्रण रेखा के पास माछिल सेक्टर में एक ऊंचाई वाली चौकी पर तैनात 30 वर्षीय कांस्टेबल नारायण बेहरा की शादी दो मई को होनी तय है.

उन्होंने कहा कि इस समय एलओसी चौकी बर्फ से ढकी हुई है और कश्मीर घाटी के साथ इसका सड़क संपर्क फिलहाल बंद है. इन स्थानों पर तैनात सैनिकों के लिए सैन्य हवाई उड़ान ही परिवहन का एकमात्र उपलब्ध साधन है. अधिकारी के अनुसार जवान के माता-पिता ने हाल ही में यूनिट कमांडरों से संपर्क किया. वे चिंतित थे, क्योंकि शादी की उक्त तिथि के लिए सभी तैयारियां कर ली गई थीं. उन्हें लग रहा था कि उनका बेटा अपनी शादी के लिए समय से नहीं पहुंच पाएगा.

मामला बीएसएफ के महानिरीक्षक (कश्मीर फ्रंटियर) राजा बाबू सिंह के संज्ञान में लाया गया. उन्होंने आदेश दिया कि श्रीनगर में तैनात बल का चीता हेलीकॉप्टर तुरंत बेहरा को एयरलिफ्ट करे. हेलीकॉप्टर गुरुवार तड़के बेहरा को श्रीनगर ले आया. वह अब ओडिशा के ढेंकनाल जिले के आदिपुर गांव में अपने घर जा रहे हैं. सिंह ने बताया कि उन्होंने एयरलिफ्ट को मंजूरी इसलिए दी क्योंकि सैनिकों का कल्याण उनकी ''पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता'' है.


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