News4Nation की खबर का असर, देशी फ्रिज बनानेवाले हरि पंडित से मिले एसडीएम, कहा रोजगार के लिए मिलेगा ऋण

News4Nation की खबर का असर, देशी फ्रिज बनानेवाले हरि पंडित से मिले एसडीएम, कहा रोजगार के लिए मिलेगा ऋण

BETTIAH : जिले में NEWS4NATION पर खबर प्रकाशित किए जाने के बाद देशी फ्रिज बनानेवाले हरि पंडित को मदद मिलना शुरू हो गया है। खबर चलाये जाने के बाद बगहा अनुमंडल पदाधिकारी देशी फ्रिज बनाने वाले के घर पहुंचे और कहा की हरि पंडित को अब पैसे की कमी रोक नहीं पायेगी। प्रधानमंत्री रोजगार योजना से पंजीकृत कर हरि पंडित को ऋण दिलाया जाएगा। 

दरअसल पश्चिम चंपारण के बगहा पुलिस जिला के एक छोटे से गांव के कलाकार ने इको फ्रेंडली फ़्रीज का निर्माण किया है। जो पीएम मोदी के मन की बात से इंस्पायर है। यहीं वज़ह है कि इस लोकल फ़ॉर भोकल की गवई तकनीक व मिट्टी से निर्मित फ़्रीज की मांग अब देश के बड़े शहरों में होने लगी है। लिहाज़ा प्रशासन की ओर से हरि पंडित को पीएम स्वरोजगार योजना के तहत मदद करने का भरोसा आईएएस दीपक मिश्रा ने उनके गांव जाकर दिलाया है। दरअसल बगहा 1 प्रखंड के परसा बनचहरी निवासी 40 वर्षीय हरि पडित ने मिट्टी से पानी को 48 घण्टे तक ठंढा रखने के लिए फ़्रीज का निर्माण किया है। मिट्टी से बनाये गए इस जार की मांग स्थानीय स्तर से लेकर राज्य की राजधानी पटना व दिल्ली तक हो रही है। ख़ास बात यह है कि यह बगैर बिजली की खपत और बगैर इलेक्ट्रिक फ्रिज मिट्टी का जार पीने वाले पानी को तक़रीबन 48 घन्टे तक फ्रिज जैसे चिल्ड/ठंड़ा रखता है। वैसे तो मिट्टी के मटके में पानी रखकर ठंढा करते हुए आपने तो देखा औऱ सुना ही होगा। जिसे सुराही भी कहते हैं। लेकिन पहली बार हरि ने इस नेचुरल फ्रिज को मिट्टी से तैयार कर एक अनोखी मिशाल पेश किया है। जिसकी चर्चा दूर दूर तक हो रही है। 

बताया जा रहा है कि हरि पडींत का पूरा परिवार एक साथ मिलकर फ्रिज बनाने का काम करता है। फिर भी एक दिन में एक ही देशी फ्रिज का निर्माण हो पाता है। हरि पडित ने बताया की वैसे तो उनका यह पुश्तैनी कारोबार है। जिसे उनके दादा परदादा करते चले आ रहे हैं। उन्हें भी यह कारोबार पसंद आया और ये करने लगे। उन्होंने बताया की आम दिनों की तरह मैं भी परिवार के भरण पोषण के लिए मिट्टी के दीये, मटका, घड़ा, पतुकी, ग्लास वगैरह बना कर बेचा करता था। लेकिन इन बर्तनों के बराबरी में बाजार में कुछ साल पहले आये कागज, कूट औऱ प्लास्टिक के बर्तनों की डिमांड बढ़ती जा रही है। चुकी परिवार के पालन पोषण का यहीं एक मात्र जरिया है। बाजार में मिट्टी के बने बर्तनों की मांग कम होते देखते हुए प्रधानमंत्री के आत्म निर्भर भारत को आत्मसात करते हुए मैंने निर्णय लिया की क्यों न मिट्टी के किसी ऐसे बर्तन का निर्माण किया जाय। जो अपने आप मे अजूबा हो औऱ आम आदमी से लेकर सब के लिए फायदेमंद व सस्ता हो। बस पीने की पानी को ठंढा करने के लिए मिट्टी के इस जार के निर्माण की बात सोची और काफी प्रयास के बाद आज आप के सामने है। 

हरि ने आगे बताया की इस जार की खासियत है की इसमे रखा हुआ पानी 48 घन्टे तक फ्रिज में रखे पानी की तरह बिल्कुल चिल्ड (ठंढा) रहता है। इतना ही नहीं पानी खराब भी नहीं होता है। मिट्टी के इस जार में पानी को रखने के बाद पानी का स्वाद भी बदल जाता है। इसमें आम आदमी को फ्रिज चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं होती है। जिससे आर्थिक बचत भी होती है। इसके लिए मिट्टी के गुथने का तरीका अलग है। इसके निर्माण की मिट्टी को गुथने में और की बजाय अधिक समय लगता है। पूरे एक दिन में एक हीं जार तैयार हो पाता है। लेकिन इसे पूरी तरह तैयार करने में 15 दिन का समय लगता है। चुकी निर्माण के बाद 14 दिनों तक सिर्फ छांव में सुखाया जाता है। इसे न आग में पकाया जाता है और न हीं धूप में सुखाया जाता है। काफी सावधानी पूर्वक देखरेख में छांव में सुखाने का काम किया जाता है। तब इसका रंग रोगन किया जाता है। जार में पानी डालने के लिए ऊपर एक ढक्कन होता है औऱ फ़िर पानी निकालने के लिए नीचे में एक नल भी लगाया गया है ताकि जार को बगैर हिलाए डुलाए भी पीने का पानी आसानी से निकाल लिया जाय। हरि बताते हैं की मिट्टी की मेहनत को देखा जाय तो एक जार के निर्माण में 350 रुपये की लागत आती है और इसे बाजार में उनके द्वारा 500 रुपये में बेचा जाता है। उन्होंने बताया की पहले उन्होंने स्वयं इसे बनाकर इसमे पानी रखकर एक्सपेरिमेंट किया। तब बाजार में उतारा। अभी मुश्किल से एक माह हुए इसको बनाते हुए औऱ अभी तक 25 से ज्यादा जार वे बेच चुके हैं। जो राज्य की राजधानी पटना तक के लोग ले गए हैं। इधर पटना व दिल्ली से हीं क़रीब 50 जार बनाने के ऑर्डर मिले हैं। जिसकी तैयारी में वे लगे हुए हैं। इनका कहना है की अगर ज्यादा संख्या में ऑर्डर मिलता है तो मांग के अनुसार और अधिक मजदूरों व ख़र्च की आवश्यकता होगी। साथ ही कुछ लोगो को रोजगार भी मिल सकेगा। जो मेक इन इंडिया में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

बेतिया से आशीष कुमार की रिपोर्ट

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