दिव्यांग छोटू मां के साथ महाआन्दोलन में हुआ शामिल :शिक्षक बनने का सपना कब होगा अपना..जागिये सरकार

 दिव्यांग छोटू मां के साथ महाआन्दोलन  में हुआ शामिल :शिक्षक बनने का सपना कब होगा अपना..जागिये सरकार

डेस्क... बिहार शिक्षक बहाली को लेकर अभ्यर्थियों की आर-पार की जंग जारी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि राजधानी की कंपकपाती ठंड में या तो नियुक्ति पत्र लेकर जाएंगे या फिर जीवन से मुक्ति पाकर जाएंगे। बेरोजगारी बिहार में सबसे बड़ा मुद्दा है और इस मुद्दे को लेकर बिहार में एनडीए सरकार फिर से आई और इन अभ्यर्थियों को पूरी उम्मीद थी कि उन्हें नियुक्ति मिल जाएगी, लेकिन कोर्ट के आदेश भी सरकार के लिए मायने नहीं दिख रहे हैं। ऐेस में आंदोलन का रास्ता अभ्यर्थियों ने चुना है। इस आंदोलन में सभी 38 जिलों से अभ्यर्थियों का जुटान हुआ है, जिसमें एक अभ्यर्थी ऐसा भी दिखा, जो शारीरिक रूप से विकलांग होने के बाद भी उसे अपनी बूढ़ी मां का सहारा इसलिए मिला कि वो अपनी बाकि की जिंदगी बिना दूसरों के सहारे बिता सके। शायद ये मानवीय संवेदना सरकार को दिखे...

हम बात कर रहे हैं औरंगाबाद से आए छोटू दिव्यांग की, जहां उससे ज्यादा हौसला और सपने उनकी मां की आंखों में हैं, जो उन्हें औरंगाबाद से पटना ले आईं, ताकि बेटे को नौकरी मिल सके। आंदोलन महज लोकतंत्र का एक हिस्सा है। उनके इस जज्बे को देखकर वहां आए अन्य अभ्यर्थियों का हौसला और भी बढ़ गया है। लोग उन्हें देखकर सरकार को कोस रहे हैं कि क्या उनकी मानवीय संवेदना मर गई है। 

वहीं, इस पूरे मामले को लेकर मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड कोइलख गांव से आए देवेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि जो बहाली प्रक्रिया रोक दी गई है, उसको पुन: शुरू करके शीघ्र काउंसेलिंग का डेट जारी कर और सरकार नियोजन पत्र देने का काम करे, नहीं तो और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। उनके साथ मधुबनी से सैकड़ों अभ्यर्थी पटना के गर्दनीबाग में जुटे हैं।


इस दौरान गया जिले के इमामगंज से आए राजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि पटना की धरती पर आएं हैं तो महाआंदोलन को सफल बनाकर ही जाएंगे। हम अभ्यर्थियों के अब बर्दाश्त की सीमा रेखा पार हो चुकी है। सरकार इस प्रकार शिक्षक अभ्यर्थियों से करेगी, हमें ये पता नहीं था। ये हमारे साथ धोखा है। 

राजधानी के गर्दनीबाग में हजारों की संख्या में सोमवार को बिहार शिक्षक बहाली को लेकर अभ्यर्थी पहुंचे और अपना दर्द हमसे साझा किया। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 2 सालों से चल रहे हैं 94000 शिक्षकों की बहाली अब तक पूरी नहीं हो पाई है, जिससे अभ्यर्थी नाराज हैं। अब हमारे पास करो या मरो के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है। हम इसी संकल्प को लेकर यहां पहुंचे हैं। अभ्यर्थियों का कहना था कि इस कंपकपाती ठंड में भी बहाली की उम्मीद लिए कोई सहरसा से तो कोई रोता से तो कोई भागलपुर से पहुंचा है। शायद.. हम अभ्यर्थियों की लाचारी है और दर्द सुनकर किसी का पत्थर दिल भी पिघल जाए। 

सर्दी शबाव पर है और पूरा पटना नींद की आगोश में है, लेकिन सोमवार की देर रात गर्दनीबाग में टेंट के नीचे हजारों अभ्यर्थी उस बात की सजा काट रहे हैं, जो उन्होंने की ही नहीं। यह विडंबना ही कहेंगे और कुछ नहीं। जब उम्मीदें टूट जाती हैं और हर बात अनसुनी हो जाती है तो आंदोलन ही एक रास्ता दिखता है। जाहिर है कि बिहार के दूर-दूर से हर एक जिले से आए छात्र अब गर्दनीबाग पहुंचने लगे हैं और खुद को महाआंदोलन की आग में झोंकने को तैयार हैं। इस आंदोलन से शायद सरकार इनकी गुहार सुन लेगी और शिक्षक बहाली का पूरी तरह से रास्ता साफ हो जाएगा। हैरानी की बात तो यह है कि 2 साल से बहाली की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक बिहार सरकार से 94000 शिक्षकों की बहाली नहीं हो पाई है।

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