देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी गांव को भूल गई सरकार, हाईकोर्ट की कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में जताई चिंता

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी गांव को भूल गई सरकार, हाईकोर्ट की कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में जताई चिंता

PATNA/SIWAN : पटना हाईकोर्ट में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा पर वकीलों की समिति ने रिपोर्ट रखा। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी सम्बंधित पक्षों को इस रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने उन्हें इस रिपोर्ट पर टिप्पणियां और सुझाव अगली सुनवाई में देने को कहा।

वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात कहीं। साथ पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की  स्थिति भी असंतोषजनक पाया। साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की दुर्दशा को भी वकीलों की कमिटी ने गम्भीरता  से लिया। 

बता दें कि इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने  हुए केंद्र व राज्य सरकार से 3 जनवरी,2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया था। साथ ही पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की एक तीन सदस्यीय टीम गठित किया था।इस टीम को जीरादेइ और वहां स्थित स्मारकों,पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित स्मारकों का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट इस सुनवाई में कोर्ट में प्रस्तुत करना था।

जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जीरादेई गांव  व वहां  डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है।न तो वहां पहुँचने के सड़क की हालत सही है, न ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति ठीक है।

केंद्र और राज्यों ने की उपेक्षा

कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है। कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती हैं।इस स्थिति में  शीघ्र सुधार के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर कार्रवाई करने की जरूरत है।

डा राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने। इस पद पर उन्होंने मई,1962 तक कार्य किया। बाद में राष्ट्रपति के पद  से हटने के बाद पटना के सदाकत आश्रम में रहे,जहां 28 फरवरी,1963 को उनकी मृत्यु हुई। ऐसे महान नेता के स्मृतियों व् स्मारकों की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाना उचित नहीं हैं।इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 5 जनवरी,2022 को होगी।

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