बदनाम 'अफसर' माल कमा बच निकला! अधिकारी ने भ्रष्ट MVI मृत्युंजय सिंह के साथ मिलकर बालू से खूब खाई मलाई, पटना में दोनों की जोड़ी व रिश्तेदारी की थी चर्चा

बदनाम 'अफसर' माल कमा बच निकला! अधिकारी ने भ्रष्ट MVI मृत्युंजय सिंह के साथ मिलकर बालू से खूब खाई मलाई, पटना में दोनों की जोड़ी व रिश्तेदारी की थी चर्चा

PATNA: बिहार में बालू से मलाई खाने में बड़े-बड़े अफसर शामिल रहे। आर्थिक अपराध इकाई ने जांच के बाद दो एसपी समेत कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की है। ईओयू ने एक दर्जन से अधिक बालू के अवैध धंधे में संलिप्त अफसरों की संपत्ति की भी जांच की है। आज मंगलवार को भी पटना के तत्कालीन व परिवहन विभाग के चहेते एमवीआई मृत्युंजय सिंह पर कार्रवाई की गई है। लोेकिन कुछ ऐसे अफसर हैं और जिनकी सेटिंग इतनी तगड़ी थी कि जमकर माल बटोरा और सेटिंग की बदौलत ईओयू की आंख में धूल झोंक कर निकल गये। वैसे पटना के परिवहन विभाग में डीटीओ-एमवीआई पर कार्रवाई हुई लेकिन एमवीआई की जो़ड़ी के रूप में चर्चित और काफी बदनाम अफसर साफ निकल गये और ठाठ से बड़े पद पर नौकरी कर रहे।

कुछ महीने में ही पटना से मुजफ्फऱपुर और फिर भोजपुर में हुई पोस्टिंग

जानकर सूत्र बताते हैं कि भनक लगते हीं बिहार प्रशसानिक सेवा के उस अफसर ने पटना से अपना ट्रांसफऱ मुजफ्फरपुर करा लिया। ईओयू जब बालू खनन में अफसरों पर शिकंजा कसना शुरू किया इसी बीच सेटिंग की बदौलत उस अफसर का ट्रांसफऱ मुजफ्फरपुर हो गया। कुछ महीने के बाद ही उस अफसर ने अपनी सेवा वापस कराते हुए मुजफ्फरपुर से स्थानांतरण करा लिया और भोजपुर में पोस्टिंग ले ली। इस तरह से बदनाम चेहरा बच निकला और वर्तमान में अनुमंडल के बड़े पद पर नौकरी कर रहा। जानकार सूत्र बताते हैं कि एमवीआई मृत्युंजय सिंह और उस अफसर की जोड़ी थी और रिश्तेदारी भी। 

भ्रष्ट अफसर को परिवहन विभाग का था वरदहस्त

के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है। चहेते घोटालेबाजों को बचाने की लाख कोशिश के बाद भी परिवहन के कई अफसर भ्रष्टाचार में नपे हैं। हाल ही में पटना के तत्कालीन डीटीओ पर कार्रवाई हुई थी। अब एक और बड़े ताकतवर और विभाग के चहेते मोटरयान निरीक्षक पर कार्रवाई की गई है। आर्थिक अपराध इकाई ने परिवहन विभाग के चहेते एमवीआई पर नकेल कसा है। ईओयू ने बालू से मलाई खाने में संलिप्तता के बाद आरोपी मृत्युंजय कुमार सिंह के खिलाफ आय से 531 % अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में केस दर्ज किया है। इसके बाद पटना ,रांची समेत तीन ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। जानकार बताते हैं कि एमवीआई मृत्युंजय कुमार सिंह पर परिवहन विभाग की लंबे समय से कृपा बरस रही थी। सेटिंग इतनी तगड़ी थी कि पटना से मनचाही जगह गया में पोस्टिंग की गई। फिर उसे परिवहन मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार देकर सप्ताह में तीन दिन पटना बुला लिया गया। जबकि पटना में ऑलरेडी तीन एमवीआई थे। लेकिन आर्थिक अपराध इकाई की सख्ती से विभाग की एक न चली और दोनों जगहों से हटा कर वेटिंग फॉर पोस्टिंग रखना पड़ा।  आखिर आरोपी एमवीआई पर कृपा कैसे बरस रही थी जानें...... 

बेनकाब हुआ परिवहन विभाग!

परिवहन विभाग ने तीन साल पहले 22 जून 2018 को 21 मोटरयान निरीक्षकों का स्थानांतरण-अतिरिक्त प्रभार देने का आदेश जारी किया था। विभाग के उस आदेश में 19 वें नंबर पर एमवीआई मृत्युंजय कुमार सिंह का नाम था। जिन्हें रोहतास से स्थानांतरण कर पटना पदस्थापित किया गया। इसके साथ ही परिवहन विभाग ने अपने कार्यों के अतिरिक्त परिवहन मुख्यालय में प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी किया। विभाग के आदेश पर एमवीआई ने तीन सालों तक पटना जिला और परिवहन मुख्यालय का काम देखा। तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद परिवहन विभाग ने 30 जून 2021 को एमवीआई के स्थानांतरण का दूसरा आदेश जारी किया। विभाग के नये आदेश में खास एमवीआई पर फिर से कृपा बरसाई गई। इस बार चहेते एमवीआई को पटना जिला से स्थानांतरित कर गया पदस्थापन किया गया। इसके साथ ही लगे हाथ पटना परिवहन मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दे दिया। अब आप समझ गये होंगे कि खेल क्या है........

गया पदस्थापित कर फिर से परिवहन मुख्यालय का दिया था प्रभार

दरअसल चहेते एमवीआई को किसी कीमत  पर पटना से बाहर नहीं जाने देना था। लिहाजा फिर से मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। 2018 में पटना के एमवीआई पद पर पदस्थापना के साथ ही एमवीआई मृत्युंजय कुमार सिंह को पटना मुख्यालय का प्रभार दिया गया था.इस आधार पर कि इसे पटना जिला पदस्थापित किया गया। 2021 में उस सरकारी सेवक का स्थानांतरण गया जिला किया जाता है। लेकिन इस बार पटना वाले एमवीआई को मुख्यालय का प्रभार नहीं दिया गया फिर से उन्हीं को जिसे पटना से गया में पदस्थापित किया गया था पटना मुख्यालय का प्रभार दे दिया गया। हालांकि परिवहन विभाग से सेटिंग कर एमवीआई मृत्युंजय ने फिर से पटना मुख्यालय का प्रभार जरूर ले लिया। लेकिन वो अधिक दिनों तक बने नहीं रहे। जुलाई महीने में ही बालू कांड होने के बाद उन्हें हटा दिया गया और वेटिंग फॉर पोस्टिंग रखा गया है। अब तो ईओयू आय से अधिक संपत्ति केस में मंगलवार को छापेमारी की है। इसमें अब निलंबित होना तय है। 

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