मार्क्सवाद ने किया हिंदुओं का दमन,'हिंदुइज्म' शब्द गढ़ने वालों का मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को विभाजित रखना : जे नंद कुमार

मार्क्सवाद ने किया हिंदुओं का दमन,'हिंदुइज्म' शब्द गढ़ने वालों का मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को विभाजित रखना : जे नंद कुमार

PATNA : पटना के वरिष्ठ पत्रकारों व बुद्धिजीवियों के साथ बातचीत करते हुए मंगलवार को 'प्रज्ञा प्रवाह' के राष्ट्रीय संयोजक जे. नन्द कुमार ने कहा कि हिंदुत्व का विचार अखंड भारत की एक सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आवाज है जो देश की धार्मिक सनातन परंपराओं को दर्शाता है। हिंदू धर्म ने हमेशा सामाजिक धर्म और शासन की भूमिका को प्रमुखता दी है। हम भारत के सबसे पुराने साहित्य में इसे स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। भारत के सन्यासी, ऋषि-मुनि ने अपने परिवार या समाज का कल्याण नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का कार्य किया। विवेकानंद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सेवाधर्म को सशक्त कीजिये, तभी राष्ट्र सशक्त होगा। हिंदुत्व के कमजोर होने का मतलब है राष्ट्र का विपत्तियों से घिर जाना। आज के युवा सवाल कर रहे हैं, उन्हें कोई भ्रमित नहीं कर सकता। यह शुभ संकेत है। 'बदलते दौर में हिन्दुत्व' पुस्तक के लेखक नंदकुमार ने आज  कहा कि 'ख़लीफेत' शब्द को खिलाफत बना कर टर्की के विवाद को भारतीय स्वाधीनता आंदोलन से जोड़ने का षड्यंत्र किया गया, ताकि भ्रम पैदा किया जा सके। स्वाधीनता संग्राम के पूरे डिस्कोर्स को बदलने की कोशिश का ही नतीजा रहा कि देश का विभाजन सम्भव हो सका। देश के विभाजन से हम सबक नहीं सीखे, जिसकी वजह से कश्मीर से बड़ी संख्या में पलायन हुआ। 

उन्होंने पंडित नेहरू को लेकर कहा कि नेहरू कहा करते थे कि मैं जन्म से क्रिश्चियन हूँ, संस्कार से मुस्लिम लेकिन अचानक यानी एक्सीडेंटली हिन्दू बन गया। हिंदु में इज्म जोड़कर हिंदुत्व के महत्व को खत्म करने का प्रयास किया गया। हिंदुइज्म शब्द गढ़ने वालों का मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को विभाजित रखना और अल्पसंख्यकों को एकजुट करने के लिए समर्थन देना है। लेकिन आज समय बदल चुका है। आज वही लोग यानी उनकी पीढ़ी के लोग अपने आप को हिंदुत्व साबित करने के लिए शर्ट के ऊपर जनेऊ पहन कर मंदिर घूमते हैं। समाज को शिक्षित होने के साथ ही उनका जो षड्यंत्र था, उसका पर्दाफाश होने लगा है।

चीन में तय होती है देश के त्योहार में लोग क्या पहनेंगे, क्या इस्तेमाल करेंगे

नंद कुमार ने कहा कि टेक्नोलॉजी बनाम लोकतंत्र के बीच लड़ाई शुरू हो गई है। रक्षाबंधन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चीन या अन्य देशों में कुछ टेक्नोक्रेट यह तय करते हैं कि पटना के अमुक व्यक्ति किस तरह का राखी पहनेंगे। यह टेक्नोलॉजी आज के समय में लोगों के विचार पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने गांधी जी के विचार को कोट करते हुए कहा कि दुनियाभर की संस्कृति का हम स्वागत करेंगे, लेकिन कोई तूफान बनकर तबाही मचाये, ऐसा स्वीकार्य भी नहीं होगा।

मार्क्सवाद ने हिंदुओं का किया दमन

जे नंद कुमार ने कहा कि भारत में आज मार्क्सवाद सबसे अधिक केरल में छाया हुआ है, जहां कम्युनिस्ट पार्टी राज्य में शासन कर रही है। इसकी हिंदू विरोधी और तानाशाही प्रवृत्ति सबरीमाला मंदिर मामले में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। जहां कम्युनिस्ट शासित सरकार ने हिंदुओं के दमन के लिए पुलिस और सैन्य बल का इस्तेमाल किया और प्रशासनिक स्तर पर हिंदू मंदिरों के संचालन में हस्तक्षेप किया। वहीं, ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल में हिंदू आवाज को दबाने के लिए वामपंथी एजेंडे को जारी रखा है। हालांकि, उनके शासन को राष्ट्रीय चुनाव में चुनौती मिली थी। उन्होंने कहा कि केरल के मोपला में हिंदुओं का जो नरसंहार हुआ था, वहां 'स्मारक' की स्थापना होनी चाहिए। नंदकुमार ने कहा कि जब हम अर्थव्यवस्था के बारे में विचार करते हैं तब नागरिकों के साथ एक राष्ट्रवादी परिदृश्य के उभार के बारे में बात करना जरूरी हो जाता है। क्योंकि राष्ट्रीय गौरव के बिना कोई देश प्रगति नहीं कर सकता और आरएसएस अपने विभिन्न संगठनों के जरिए उसी राष्ट्रीय गौरव या श्रद्धा को फिर से जगाने का काम कर रहा है।

प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक के साथ आयोजित बैठक में वरिष्ठ पत्रकार प्रियरंजन भारती, प्रवीण बागी, राकेश प्रवीर, दीपक मिश्रा,कौशलेंद्र कुमार, रूपेश कुमार, संजीव कुमार, कृष्णकांत ओझा व बुद्धिजीवी तथा प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्रीय संयोजक रामाशीष जी, प्रो.किस्मत कुमार सिंह, बिहार लोकसेवा आयोग की सदस्य डॉ (प्रो.) दीप्ति कुमारी, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ गुरु प्रकाश व प्रदेश उपाध्यक्ष शम्भू सिद्धार्थ आदि उपस्थित थे।

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