परिवहन विभाग में MVI फार्मूला लागू रहेगा, गाड़ियों को बिना 'देखे' मिलते रहेगा फिटनेस सर्टिफिकेट, बिहटा केंद्र का CM ने किया शिलान्यास

परिवहन विभाग में MVI फार्मूला लागू रहेगा, गाड़ियों को बिना 'देखे' मिलते रहेगा फिटनेस सर्टिफिकेट, बिहटा केंद्र का CM ने किया शिलान्यास

पटनाः बिहार में निबंधित करीब 10 लाख व्यवसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाण-पत्र का कोई इंतजाम नहीं है।वर्तमान में बिहार में फिटनेस प्रमाण पत्र देने का MVI फार्मूला लागू है।इस फार्मूला के तहत जिले के MVI बिना जांचे ही ऑफिस में बैठ कर सिग्नेचर करते हैं और फिट-अनफिट गाडियां पूरी तरह से दुरूस्त हो जाती हैं। बिहार में हर दिन हजारो गाड़ियों का इसी फार्मूले के तहत फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किये जा रहे हैं.  देश में शायद बिहार पहला ऐसा राज्य है जहां गाड़ियों के फिटनेस जांच की इस तरह की व्यवस्था लागू है।सरकार का भद्द पिटने के बाद एक फिटनेस प्रमाणन केंद्र की आज नींव रखी गई है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज इसका शिलान्यास किया है। इस केंद्र के बनने में सालो लगेंगे तब तक बिहार में गाड़ियों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एमवीआई फार्मूला लागू रहेगा। बिहटा केंद्र अगर बन कर तैयार भी हो जाता है फिर भी 10 लाख गाड़ियों का एक केंद्र से फिटनेस प्रमाण पत्र देना संभव है ?  

बिहटा में बनेगा फिटनेस प्रमाणन केंद्र

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुमार ने आज बिहटा में बनने वाले निरीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र का शिलान्यास किया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से अत्याधुनिक इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर बिहटा में बनाया जा रहा है. सेंटर के निर्माण को लेकर बिहार सरकार ने 3 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है. योजना के कुल लागत ₹19करोड़ 65 लाख रू है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा ₹16.50करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है. सेंटर के निर्माण के लिए निर्धारित भूखंड पर बाउंड्री वाल एवं लैंड डेवलपमेंट पर होने वाले व्यय 3.15 करोड़ रू का वाहन राज्य सरकार के द्वारा सड़क सुरक्षा निधि मद से की जाएगी. इस सेंटर का निर्माण सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट पुणे द्वारा किया जा रहा है. परिवहन विभाग द्वारा बताया गया है कि बिहटा में इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर के प्रारंभ होने से पटना तथा इसके आसपास के जिलों में परिचालित सभी व्यवसायिक वाहनों का ऑटोमेटेड तरीके से जांच किया जा सकेगा. साथ ही जांच किए वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र एवं प्रदूषण प्रमाण पत्र निर्गत किया जाएगा. इससे वाहनों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण की स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा, साथ ही सड़क दुर्घटना में कमी आएगी. बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में बिहटा में एक केंद्र के शुरू होने से पूरे बिहार की गाड़ियों का फिटनेस प्रमाण देना कैसे संभव होगा ?

फिटनेस जांच की व्यवस्था नहीं,जांच के नाम पर नौटंकी 

परिवहन विभाग का सिस्टम किसी मजाक से कम नहीं। अधिकारी सरकार की आंखों में धूल झोंकते हैं। विभाग की तरफ से दावे किये जाते हैं कि गाड़ियों की जांच कर फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब सूबे में कहीं भी जांच केंद्र ही नहीं है तो फिर जांच कहां की जाती है। परिवहन विभाग समय-समय पर फिटनेस जांच की नौटंकी करता है। अभी हाल ही में सड़क सुरक्षा माह के आयोजन के नाम पर गाड़ियों का फिटनेस जांच का अभियान चलाया गया। बड़ा सवाल यही है कि जब फिटनेस जांचने की कोई व्यवस्था ही नहीं तो फिर जांच कैसे हुई। जानकार बताते हैं कि सभी जिलों में डीटीओ-एमवीआई ने सिर्फ फिटनेस जांच का दिखावा किया। इतना ही नहीं गाड़ियों के फिटनेस पर ध्यान देने की बजाए परिवहन विभाग ने ड्राइवरों के आंख जांच का अभियान शुरू किया और 5 हजार ड्राइवरों की आंख जांच कर चश्मा दिया। सवाल यहीं पर है कि क्या सिर्फ आंख जांच करने से दुर्घटना कम होगी या फिर गाड़ियों का भी फिट होना जरूरी है ? जानकार बताते हैं कि अगर सरकार सड़क दुर्घटना में वाकई में कमी लाना चाहती है तो फिर सिस्टम को दुरूस्त करना होगा। ड्राईवरों के आंख जांच या दिखावे के लिए गाड़ियों के फिटनेस प्रमाणपत्र जांच का अभियान चलाने से सड़क दुर्घटना में कमी नहीं आयेगी। बल्कि सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों का दुरूस्त होना जरूरी है।

बिना देखे एमवीआई जारी करते हैं फिटनेस प्रमाण पत्र

जानकार बताते हैं कि परिवहन विभाग समय-समय पर कॉमर्शियल गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करता है।इस तकनीक वाले युग में भी परिवहन विभाग के अधिकारी बिना देखे ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करते हैं. वर्ष 2003-04 में सरकार की तरफ से ऑनलाइन फिटनेस जांच केंद्र की मंजूरी दी गई थी,इसकी संख्या 40 थी. लेकिन अब सूबे में निजी क्षेत्र में एक भी ऑनलाइन फिटनेस केंद्र संचालित नहीं हैं।सभी फिटनेस केंद्र का लाइसेंस खत्म हो गया इसके बाद परिवहन विभाग की तरफ से कोई नया लाइसेंस जारी नहीं की गई है।वहीं दूसरी तरफ बिहार में सरकार का अपना कोई भी फिटनेस केंद्र नहीं है। फिटनेस का काम विभाग ने एमवीआई को सुपूर्द कर दिया है। सरकार के पास एक भी डिजिटल फिटनेस केंद्र नहीं है। एक तरफ परिवहन विभाग का सारा काम ड्राईविंग लाइसेंस से लेकर अदना सा काम ऑनलाइन और डिजिटल मोड में हो रहा,लेकिन फिटनेस प्रमाण पत्र एमवीआई के द्वारा आंख से देखकर ही जारी किया जा रहा है। कई जगहों से ऐसी शिकायत भी लगातार मिलती है कि एमवीआई बिना जांच के ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया.

बिहार में करीब 9.6 लाख कॉमर्शियल वाहन

बिहार मोटर व्हेकिल फिटनेस एसोसिएशन की तरफ से परिवहन विभाग से ऑनलाइन फिटनेस को लेकर लाइसेंस निर्गत करने की मांग की जाती रही है।लेकिन परिवहन विभाग को एमवीआई के आंख पर ज्यादा भरोसा है।बिहार विधान मंडल में इस मामले को कोई दफे उठाया गया लेकिन सरकार मामले को उलझाती रही. परिवहन विभाग ने जून 2020 में विधान परिषद में पूछे गए सवाल का जवाब दिया था। तत्कालीन मंत्री संतोष निराला की तरफ से दिए गए जवाब में कहा गया कि बिहार में 9 लाख 57 हजार निबंधित कॉमर्शियल वाहन हैं। 2015 से बिहार में संचालित निजी फिटनेस केंद्र के नवीकरण एवं नये फिटनेस केंद्र के लाइसेंस की स्वीकृति पर रोक है। मोटर यान निरीक्षक की तरफ से व्यवसायिक वाहनों की जांच कर फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है।हालांकि तब मंत्री जी यह नहीं बता पाये थे कि बिहार में ऑनलाइन गाड़ियों की जांच कर फिटनेस देने का काम कब शुरू होगा. जानकार बताते हैं कि परिवहन विभाग में आज भी गाड़ियों के फिटनेस जांच में उच्च तकनीक का इस्तेमाल नहीं होने के पीछे बड़ी वजह है।जिस कारण आज भी एमवीआई के आंखों पर ही विश्वास किया जा रहा है।

सीएम नीतीश ने दिया था आदेश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2021 के पहले दिन परिवहन विभाग की समीक्षा की थी। मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया था कि वाहनों की फिटनेस पर विशेष ध्यान दें ताकि दुर्घटना पर लगाम लग सके और अनफिट गाड़ियां सड़क पर नहीं दौड़े. सीएम ने अफसरों से कहा कि फिटनेस जांच को लेकर सक्रिय हों और विशेष ध्यान दें.

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