बिहार में कड़ाके वाली सर्दी पर भारी है सियासी पारे की गर्माहट ... राजनीतिक दलों ने जनवरी को बना दिया जंगी अखाड़ा

बिहार में कड़ाके वाली सर्दी पर भारी है सियासी पारे की गर्माहट ... राजनीतिक दलों ने जनवरी को बना दिया जंगी अखाड़ा

पटना. बिहार में इन दिनों कड़ाके वाली सर्दी पड़ रही है. पटना और गया जैसे दर्जन भर जिलों का तापमान तो शिमला से भी कम है. ठंड के कारण राज्य के कई जिलों के स्कूलों में करीब एक पखवाड़े की छुट्टी हो चुकी है. लेकिन कंपकंपी वाली सर्दी में भी बिहार में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. सियासत की गर्मी पर सर्दी के सिहरन का कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है. मानो राज्य के सभी राजनीतिक दलों को जनवरी का ही इंतजार था कि वे एक साथ अपने सियासी समर को आगे बढ़ाने के लिए रणनीति बना सकें. 

जनवरी शुरू होने के साथ ही बिहार से सर्दी भी बढ़ी है तो दूसरी ओर सियासी रंग भी चढ़ गया है. प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से कई ऐसे अभियान शुरू किए गए हैं जो उनकी भविष्य की राजनीति को चमकाने में मददगार हो सकते हैं. इसी क्रम में कड़ाके वाली ठंड में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाधान यात्रा की शुरुआत की है. वे राज्य का दौरा कर रहे हैं. 5 जनवरी से शुरू हुई उनकी इस यात्रा को ऐसे तो गैर राजनीतिक कहा जा रहा है. इसे बिहार सरकार की योजनाओं की सुध लेने की नीतीश की पहल के रूप में बताया जा रहा है. लेकिन, इसके पीछे की राजनीति को भी समझना होगा. 

बिहार में अगले दो साल बेहद अहम हैं. 2024 में लोकसभा चुनाव होना है और एक साल बाद यानी 2025 में विधानसभा चुनाव होगा. ऐसे में नीतीश कुमार की समाधान यात्रा को भविष्य की योजना बनाने के मकसद से देखा जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार अपनी इस यात्रा से तमाम जिलों की उन जरूरतों को सूचीबद्ध करेंगे जिस पर काम करके जनता का दिल जीता जा सकता है. समाधान यात्रा से उन जिलों की समस्या का आकलन कर उसे दूर किया जाएगा. इससे आने वाले चुनावों में जदयू को बड़ा लाभ हो सकता है. 

शीतलहर वाली सर्दी में ही कांग्रेस भी राजनीतिक फिजां को गरमाए हुए है. कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा बिहार में 5 जनवरी को शुरू हुई है. इस यात्रा में आने वाले समय में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी भी जुड़ेंगे. भले राहुल गांधी अपनी इस यात्रा को देश जोड़ने की पहल कहें लेकिन इसे कांग्रेस का जन जुड़ाव को बढ़ाने वाली योजना के रूप में देखा जा रहा है. बिहार में अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए कांग्रेस अपनी इस यात्रा को काफी गंभीरता से ले रही है. यही वजह है कि कड़ाके की ठंड में भी पार्टी के नेता यात्रा को सफल बनाने में पूरी मुस्तैद हैं. 

वहीं भाजपा ने नए साल के शुरू होने के साथ ही बिहार में चुनावी शंखनाद किया. 3 जनवरी को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का बिहार के सारण में आना हुआ. उन्होंने साफ संदेश दिया कि बिहार में बदलाव की जरूरत है. नीतीश कुमार की नीतियों की आलोचना करते हुए उन्होंने आने वाले चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति भी साफ कर दी. सर्दी में गर्माहट लाने वाले उनके बयान से भाजपा का मनोबल बढ़ा हुआ है. भाजपा नेता अभी से चुनावों को लेकर ग्राउंड लेवल पर सक्रिय होने लगे हैं. 

इन सबके बीच मकर संक्रांति पर राजद की ओर से दही-चूड़ा भोज दिया जा रहा है. लालू-राबड़ी शासनकाल में ऐसे भोज की काफी अहमियत रही है. अब उनके बेटे और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव उस परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं. सर्द माघ में संक्रांति पर होने वाला यह भोज सियासत की गलियों में कई गरमाई किस्सों का जनक बना हुआ है. और संक्रांति पर ही जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी दही –चूड़ा का भोज दे रहे हैं. उनके भोज की अभी से सियासी चर्चा है क्योंकि उनके भोज में विपक्ष के नेताओं को भी आमंत्रित करने की बात सामने आई है. ऐसे में इस भोज से क्या नया गुल खिलता है यह भी इस शीतलहर वाले मौसम में नए सियासी लहर को अफवाह दे रहा है. इन सबके बीच राम विलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पासवान के बीच लगातार सियासी बयानबाजी से राजनीतिक सरगर्मी बनी है. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का लगातार शराबबंदी पर दिया जा रहा है बयान भी इस सर्द जनवरी में राजनीतिक गर्मी को बनाए हुए है. 


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