मधुसूदन नगर ड्योढी के राम दरबार में 100 साल से स्थापित राम जानकी और लक्ष्मण की कीमती मूर्ति हुई चोरी

मधुसूदन नगर ड्योढी के राम दरबार में 100 साल से स्थापित राम जानकी और लक्ष्मण की कीमती मूर्ति हुई चोरी

BANKA : बौंसी थाना क्षेत्र के गुरुधाम मधुसूदन नगर ड्योढी के राम दरबार से राम जानकी और लक्ष्मण की अत्यंत प्राचीन बहुमूल्य मूर्ति की गुरुवार रात चोरी कर फरार हो गया। बताया जा रहा है कि यह अष्टधातु निर्मित मूर्तियां 300 साल पुरानी हैं।  जमींदार के परिजन मंटू सिंह ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मूर्ति चोरी किए जाने का एक मामला स्थानीय थाने में दर्ज कराया है। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर मूर्ति की तलाश आरंभ कर दी है। पुलिस कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही है। भागलपुर से डॉग स्क्वायड टीम बुलाकर जांच कराया गया।

चोरों ने रात के अंधेरे में मंदिर का ताला तोड़कर सिंहासन पर विराजित अष्टधातु की मूल्यवान मूर्ति की चोरी कर ली। सुबह जब पूजा के लिए पंडित रामधनी झा गए तो मंदिर के दरवाजे का ताला टूटा मिला और सिंहासन से मूर्ति गायब थी। तब इसकी सूचना जमींदार के परिवारों को पंडित ने दी। 

100 साल से दरबार में था स्थापित

चोरी की गई मूर्ति जमींदार परिवार की धरोहर और विरासत का था प्रतीकराम दरबार में स्थापित राम जानकी और लक्ष्मण की मूर्ति की स्थापना मंटू सिंह के परदादा शालिग्राम सिंह द्वारा वर्ष 1922 में की गई थी। जमींदार के परिजनों ने बताया कि करीब 100 साल पहले उनके पूर्वजों ने पंजवारा ड्योढी से मधुसूदन नगर ड्योढी आकर बस गए। तब पंजवारा में स्थापित राम दरबार की सिंहासन प्रतिमा को भी साथ लेते आए और यहां मंदिर में स्थापित कर दिया।


साल भर पहले मूर्ति के शृंगार के सामान की हुई थी चोरी

मधुसूदन नगर ड्योढी के राम दरबार में चोरी की यह पहली घटना नहीं है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रत्येक वर्ष राम नवमी के अवसर पर विशेष रूप से भव्य श्रृंगार एवं पूजा अर्चना का आयोजन राम दरबार में किया जाता था। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब साल भर पहले इसी राम जानकी दरबार मंदिर से मंदिर परिसर में बाहर रखे पूजा के सामान, भोग-श्रृंगार के सामान, बर्तन तथा घड़ी घंटा को चोरों ने चुरा ली थी। उस समय मूर्ति जो ताले के अंदर दरबार में बंद था, उस पर चोरों ने नजर नहीं दिया था। तब ईश्वर की कृपा से मूर्ति सुरक्षित था और सालों साल प्रतिदिन श्रद्धालु अपने भगवान की दैनिक पूजा प्रार्थना करते आ रहे थे।

तेलंगाना के पूर्व मुख्य सचिव के पूर्वजों ने किया था स्थापित

मधुसूदन नगर ड्योढी के राम दरबार में राम-जानकी और लक्ष्मण की मूर्ति की स्थापना यहां जमींदार परिवार के सदस्य व तेलंगाना में पूर्व मुख्य सचिव शेखर प्रसाद सिंह के पूर्वजों ने की थी। शेखर प्रसाद सिंह  जो मुख्य सचिव के पद को कई वर्षों तक सुशोभित कर चुके हैं। वर्तमान में सेवानिवृत्ति के बाद वे तेलंगाना में ही रहते हैं। वह भी पूर्वजों द्वारा स्थापित भगवान की अष्टधातु मूर्ति चोरी के मामले पर काफी दुखी और आहत हैं। वे पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर बातचीत कर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है और अविलंब दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मूर्ति की बरामदगी की भी मांग की है।

जांच में जुटी पुलिस

चोरी की इस घटना पर बौंसी थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दी गई है और डॉग स्क्वायड की टीम के द्वारा सारे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। जल्द ही चोरी गई मूर्ति की बरामदगी के साथ आरोपी को चिन्हित करते हुए गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

सीतामढ़ी में भी हुई है ऐसी चोरी की घटना

राम सीता  और लक्ष्मण की मूर्तियों की चोरी सिर्फ बांका से सामने नहीं आई है। चार दिन पहले ऐसा ही एक मामला सीतामढ़ी से भी सामने आया था। यहां जिले के रुन्नीसैदपुर थाना अंतर्गत प्रेम नगर गांव स्थित रामजानकी मठ से रविवार की रात चोरों द्वारा अष्टधातु की श्री राम, माता सीता व भाई लक्षमण की मूर्तियों की चोरी कर ली गई है। मूर्ति की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह मूर्ति दो सौ साल पुरानी बताई जा रही है। यहां के धर्मेन्द्र ने बताया कि अष्टधातु के एक मूर्ति करीब अढ़ाई फ़ीट की है। जिसका वजन 25 किलो है। अगर मूर्तियों की कीमतों का आकलन लगाया जाये तो एक मूर्ति की कीमत 50 लाख रुपया होगी। ऐसे में तीनों मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में डेढ़ करोड़ से अधिक बताई गई है।


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