विश्व बैंक की टीम के सामने खुल गई बिहार के “विकास की सड़क” की पोल, निर्माण में एक-एक कर गिनवा दी कई खामियां

विश्व बैंक की टीम के सामने खुल गई बिहार के “विकास की सड़क” की पोल, निर्माण में एक-एक कर गिनवा दी कई खामियां

PATNA : बिहार में विकास की सड़क में किस तरह का काम किया गया है, इसकी पोल तब खुल गई जब निरीक्षण के लिए पहुंची विश्व बैंक की टीम ने एक-एक कर कई खामियां गिना दी। राज्य की ग्रामीण सड़कों के निर्माण का काम देखने पहुंची टीम ने साफ कर दिया कि इसमें तय मानकों के अनुसार काम नहीं किया गया है। टीम ने बिहार दौरे के दौरान ग्रामीण सड़कों की स्थिति पर नाखुशी जाहिर की है और तत्काल सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो, इसकी चेतावनी भी दी है।

निरीक्षण में मिली कई खामियां

बताया गया कि विश्व बैंक की टीम ने 19 से 23 अप्रैल और तीन से छह मई तक बिहार का दौरा किया। विश्व बैंक संपोषित मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना के तहत बन रही सड़कों में से टीम ने समस्तीपुर, चकिया व मोतिहारी में सड़कों का जायजा लिया। जबकि तकनीकी टीम ने मुजफ्फरपुर पूर्वी व पश्चिमी के अलावा महुआ कार्य प्रमंडल के अधीन बन रही सड़कों का जायजा लिया। 

सड़क सुरक्षा के बोर्ड भी गायब

टीम के निरीक्षण के क्रम में कई खामियां मिली। टीम ने पाया कि फ्लैंक में मिट्टी का कार्य सही तरीके से नहीं किया गया है। फ्लैंक में घास व झाड़ी काटने का कार्य कई जगह नहीं किया गया। सड़क सुरक्षा से संबंधित बोर्ड नहीं लगाए गए। सूचनात्मक व आम नागरिकों के हित में साइन बोर्ड व पेंटिंग का अभाव दिखा। फ्लैंक में पुराने पेड़ पाए गए पर उसकी सूचना नहीं दी गई। 

गांव मे कहीं नहीं लगाया जनता दरबार और ग्राम सभा

पुल-पुलिया का निर्माण तो कर लिया गया लेकिन उसके दोनों तरफ सुरक्षा गार्ड नहीं दिए गए। पैनल कंक्रीट को एक तिहाई मुटाई तक काटे जाने का प्रावधान है पर ऐसा नहीं किया गया। नाला बनाते समय घरों के सामने उसे कवर करना है पर ऐसा नहीं किया गया। समय-समय पर ग्रामीणों के साथ ग्राम सभा व जनता दरबार का आयोजन करना है, जो नहीं किया गया।

हरकत में आया विभाग

विश्व बैंक की आपत्ती के बाद अब विभाग हरकत में आ गया है। ग्रामीण कार्य विभाग के चीफ इंजीनियर ने विश्व बैंक से संपोषित योजना से संबंधित सभी एसई और ईई को लेटर लिखकर निर्देश दिया है कि अगर तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तथा कराए गए काम अमान्य करार दिए जाएंगे। 

जून में फिर आ सकती है टीम

बताया गया कि विश्व बैंक की टीम एक बार फिर से बिहार का दौरा कर सकती है। ऐसे में ग्रामीण कार्य विभाग उनके आने से पहले सारी कमियों को दूर करने की कोशिश में जुट गई है।

बता दें बिहार में 2021-22 में ग्रामीण सड़कों के लिए विश्व बैंक के फंड से 553 करोड़ रुपए का काम किया गया, वहीं 2022-23 में 700 करोड़ रुपए की ग्रामीण सड़क का निर्माण होना है।



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