तीन विभागों ने मिलकर नल जल योजना की 1100 करोड़ की लागत 1400 करोड़ तक पहुंचा दिया, नींद खुली तो अब नीतीश सरकार ने ले लिया यह बड़ा फैसला

तीन विभागों ने मिलकर नल जल योजना की 1100 करोड़ की लागत 1400 करोड़ तक पहुंचा दिया, नींद खुली तो अब नीतीश सरकार ने ले लिया यह बड़ा फैसला

PATNA : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल नल जल योजना को लेकर शायद ही कोई दिन ऐसा हो,जब किसी  प्रकार की शिकायत सामने नहीं आती हो, ऐसे में इस योजना को ठीक तरीके से संचालित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। अब तक इस योजना को तीन विभाग नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायत राज विभाग और पीएचईडी मिलकर संचालित करते थे। लेकिन अब इस योजना को सिर्फ पीएचईडी को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

योजना में बढ़ती  गई लागत

दरअसल, जलापूर्ति, सीवरेज, सड़क समेत 140 काम को काफी पहले पूरा करना था लेकिन तीनों विभागों में आपसी समन्वय की कमी व एनओसी में दिक्कत की वजह से सारे काम अब तक पेंडिंग है। ये सारे काम 6 से 21 महीने से पेंडिंग हैं। ये योजनाएं 1100 करोड़ की थी जिसकी लागत बढ़कर 1400 करोड़ हो गई है।

पीएचईडी ही करेगा सारे कार्य

सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। अब सीएम, डिप्टी सीएम, पीएचईडी, पंचायती राज के बीच बैठक में इस पर सहमति बनी है कि सभी काम अब एक ही विभाग पीएचईडी को सौंपा जाएगा। इससे योजनाओं के काम में तेजी आने की संभावना है। अब पीएचईडी ही बिहार में 1.17 लाख वार्डों में जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाने, पंप हाउस निर्माण, सीवरेज और छोटी सड़क का निर्माण करेगा।

एक दूसरे के काम में निकालते थे कमी

सरकार के तीन विभाग नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायत राज विभाग और पीएचईडी बिहार में यह काम कर रहे थे। मगर यदि नगर विकास कोई काम पूरा कर लेता था तो पंचायती राज की तरफ से उस पर आपत्ति जता दी जाती थी। ऐसे में सारे मामले सुलझने की बजाए उलझते जाते थे।

40 परियोजना अब तक शुरू ही नहीं हुई
 बिहार के 259 निकायों में सीवरेज, सड़क, नाली, पेयजल का काम चल रहा है। लेकिन, नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायत विभाग, पीएचईडी के आपसी सहमति में कमी की वजह से 24 निकायों में 40 परियोजनाओं का काम अब तक शुरू ही नहीं हो पाया। इसमें सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मोतिहारी, जमुई, नरकटियागंज, समस्तीपुर, जमालपुर, लखीसराय में गंदा पानी की निकासी के लिए काम होना है। लेकिन, 21 परियोजनाओं में के एनओसी नहीं मिलने की वजह से छह महीने के बाद भी काम शुरु नहीं हुआ है।

फायदे : हर घर जल पहुंचाने की सभी



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