लखीसराय में कुर्ता पायजामा पहनने वाले शिक्षक को जिलाधिकारी द्वारा फटकारने का सच आया सामने, जानिए क्या था पूरा मामला

लखीसराय में कुर्ता पायजामा पहनने वाले शिक्षक को जिलाधिकारी द्वारा फटकारने का सच आया सामने, जानिए क्या था पूरा मामला

लखीसराय. एक शिक्षक को कुर्ता-पायजामा पहनने के कारण लखीसराय जिलाधिकारी द्वारा फटकार लगाए जाने का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है. वायरल वीडियो में शिक्षक को डीएम द्वारा वेशभूषा को लेकर फटकार लगाने का जो दावा किया जा रहा था उसकी सत्यता जानने के लिए शुक्रवार को news4nation ने जिले बालगुदर पंचायत के उस स्कूल का दौरा किया तो मामला कुछ और ही सामने आया. स्कूल के प्रधानाचार्य ने वायरल वीडियो के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि डीएम ने स्कूल की अव्यवस्था को लेकर सवाल किया था. प्रधानाचार्य ने कहा कि इस दौरान उनकी वेशभूषा शालीन नहीं थी. इसलिए डीएम ने उन्हें फटकार लगाई न कि कुर्ता पायजामा पहनने के कारण. 

स्कूल के प्रधानाचार्य और अन्य शिक्षकों ने माना कि स्कूल के पांच में से सिर्फ 1 कमरे में ही पंखा था. बच्चों को बैठने के लिए बेंच और दरी भी नहीं था. स्कूल की अन्य व्यवस्थाएं भी त्रुटिपूर्ण थी. डीएम संजय कुमार ने जब स्कूल का निरिक्षण किया तो खामियों को देखकर उन्हें प्रधानाचार्य को फटकार लगाई थी. इसी दौरान प्रधानाचार्य कुर्ता पायजामा भी इस तरह से पहनने थे जो शालीन नहीं था. प्रधानाचार्य ने माना कि उनका कपड़ा पहनने का तरीका भी उस दिन सही नहीं था. इसी को लेकर डीएम ने आपत्ति जताई लेकिन लोगों ने सोशल मीडिया पर अधूरा वीडियो पोस्ट कर भ्रांति फ़ैलाने की कोशिश की. 

वहीं डीएम के दौरे और फटकर के बाद स्कूल की व्यवस्थाओं में भी सुधार आया है. प्रधानाचार्य ने बताया कि फंड की अनुपलब्धता के बावजूद उन्होंने बाजार से लाकर पंखा और अन्य उपकरण लगवाया है. वहीं एक अन्य शिक्षक ने बताया कि विद्यालय की पूर्व प्रभारी प्राचार्य रेणु देवी के समय से ही यहां अव्यवस्था है. रेणु देवी के सेवाकाल में ही काफी त्रुटियाँ रहीं जिसका खामियाजा अब नये प्राचार्य को भुगतना पड़ा. 


इस बीच, जिलाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि वे जिले के बालगुदर पंचायत के एक विद्यालय में निरिक्षण कर रहे थे तो वहां कई व्यवस्थाएं त्रुटिपूर्ण थी. विद्यालय में 5 कमरे हैं. उसमें प्रिंसिपल के कमरे को छोड़कर किसी में पंखा नहीं था, दरी नहीं था. मात्र एक कमरे में बेंच था जबकि विद्यालय की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए पर्याप्त विकास कोष आटा है. इसी को लेकर भी उन्होंने प्रधानाचार्य से सवाल किया था. साथ ही जिस ढंग से प्रधानाचार्य ने कुर्ता पायजामा पहन रखा था वह आदर्शं स्थापित नहीं करता. लेकिन पूरे दौरे के मात्र एक हिस्से का वीडियो वायरल कर भ्रम की स्थिति बनाई गई. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के कुर्ता-पायजामा पहनने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है.


Find Us on Facebook

Trending News