कॉलेजों में छात्रों की हाजिरी के लिए खत्म होगा रजिस्टर का इस्तेमाल, बिहार सरकार करने जा रही है यह बड़ा बदलाव

कॉलेजों में छात्रों की हाजिरी के लिए खत्म होगा रजिस्टर का इस्तेमाल, बिहार सरकार करने जा रही है यह बड़ा बदलाव

PATNA : बिहार के महाविद्यालयों को लेकर यह शिकायत रहती है कि यहां छात्र अनुपस्थित रहते हैं। पिछले दिनों मुजफ्फरपुर में हिंदी के शिक्षक प्रो. ललन कुमार ने सीधे सीधे बिहार के कॉलेजों में व्याप्त इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। जिसके बाद राज्य सरकार को सोशल मीडिया पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। लेकिन अब स्थिति को सुधारने के लिए बिहार की शिक्षा विभाग बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए दशकों से रजिस्टर पर हाजिरी लगाने की परंपरा को समाप्त करने का फैसला लिया गया है। अब इसकी जगह विभाग ने इसके बाद तय किया है कि छात्र-छात्राओं की हाजरी बायोमेट्रिक तरीके से बनवाई जाए।

जनवरी से होगी शुरूआत

अब शिक्षा विभाग ने तय किया है कि जनवरी माह से छात्र-छात्राओं की हाजरी बायोमेट्रिक तरीके से बनवाई जाएगी। इस आशय का पत्र विभाग के मुख्य अपर सचिव दीपक कुमार ने कुलाधिपति के प्रधान सचिव को भेजा है। उन्होंने यह आग्रह भी किया है कि कुलाधिपति के स्तर से भी कुलपतियों को मार्गदर्शन दिया जाए ताकि इनका क्रियान्वयन त्वरित गति से हो सके।  छात्र-छात्राओं की उपस्थिति के आधार पर ही उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलेगी।


अगले साल से सभी सत्र होंगे नियमित

यह जरूरी है कि सभी परीक्षाएं समय से ली जाएं और उनका परीक्षाफल समय पर प्रकाशित किया जाए। 21 जून की बैठक में सभी कुलपतियों द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया है कि वर्ष 2022-23 तक सभी सत्र नियमित कर दिया जाएगा और जून 2023 तक खत्म होने वाली सभी एकेडमिक सत्र की परीक्षाएं जून 2023 तक ली जाएगी और परीक्षाफल प्रकाशित कर दिया जाएगा।

कॉलेजों में बायोमेट्रिक मशीन उपलब्ध लेकिन उपयोग नहीं

शिक्षा विभाग के मुख्य अपर सचिव  की मानें अगले एक माह के अंदर सभी कॉलेजों में शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना जरूरी है और समेकित रुप से इसका अनुश्रवण विश्वविद्यालय स्तर पर भी आवश्यक है। बता दें कि कॉलेजों में शिक्षकों की हाजरी बायोमेट्रिक तरीके से बनवाने की पहल कई वर्ष पहले की गई लेकिन अभी तक यह कामयाब नहीं हो पाई है।


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