फिर संकट में नवादा जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी, राजनीतिक सरगर्मी तेज, जानिए क्या है पूरा मामला

फिर संकट में नवादा जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी, राजनीतिक सरगर्मी तेज, जानिए क्या है पूरा मामला

NAWADA : जिले में एकबार फिर से जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर संकट आ गई है। पटना उच्च न्यायालय ने उस एक वोट को वैध करार दिया है, जिसे अविश्वास प्रस्ताव के दौरान रद कर दिया गया था। इसके साथ ही अध्यक्ष पुष्पा देवी का जाना तय माना जा रहा है। हांलाकि अध्यक्ष खेमे के रणनीतिकार पुन: उच्च न्यायालय में पुर्नविचार याचिका दायर करने की तैयारी में हैं।

बता दें सितम्बर 18 में जिला परिषद अध्यक्ष पुष्पा देवी और उपाध्यक्ष गीता देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस दी गई थी। 24 सितम्बर को डीआडीए सभागार में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में विशेष बैठक का आयोजन हुआ था। 25 सदस्यीय सदन में 13 सदस्य बैठक में उपस्थित हुए थे। अध्यक्ष-उपाध्यक्ष समेत 12 सदस्य बैठक से अनुपस्थित थे। चर्चा उपरांत गुप्त मतदान कराया गया था। जिसमें 12 वोट अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़ा था। एक वोट में क्रॉस चिन्ह के उपर नीचे लकीर खींचे होने के कारण उसे अवैध करार दिया गया था।

तब यह बताया गया था कि पंचायत राज नियमावली में साफ किया गया है कि क्रॉस से इतर कोई चिन्ह रहने पर वोट अवैध करार दिया जाएगा और उसकी गिनती नहीं होगी। हालांकि तब सदस्यों ने कहा था कि कुछ सदस्य कम पढ़े लिखे हैं, इसलिए वोट देने में गड़बड़ी हुई है, लेकिन उनकी मंशा अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में है। लेकिन, उस दलील को अस्वीकार कर दिया गया था। फलत: अध्यक्ष की कुर्सी बच गई थी। वहीं उपाध्यक्ष की कुर्सी भी 12 के मुकाबले एक वोट से बच गई थी।

वोट रद करने के खिलाफ 13 सदस्य गए हाईकोर्ट

एक वोट रद होने के बाद विशेष बैठक में उपस्थित सभी 13 सदस्य प्रेमा चौधरी, अनिता कुमारी, अशोक यादव, धर्मशीला देवी, कांति देवी, अंजनी सिंह, नारायण स्वामी मोहन, रंजीत कुमार चुन्नु, राजकिशोर प्रसाद, राजेंद्र सिंह, पिकी भारती, पिकी देवी और साबो देवी ने उच्च न्यायालय में शपथ पत्र के साथ याचिका सीडब्लूजेसी 21718- 2018 दायर किया। जिसमें एक वोट रद करने को चुनौती दी गई।

उच्च न्यायालय ने रद वोट को माना वैध

मामले में पक्ष-विपक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने अवैध करार दिए गए एक वोट को वैध करार दिया। सोमवार को अदालत का यह फैसला आया। याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता शिधेंद्र नारायण सिंह ने पक्ष रखा था। वहीं अध्यक्ष की ओर से भी वरीय अधिवक्ता पीके शाही ने दलीलें दी थी।

बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

उच्च न्यायालय का फैसला आने के साथ ही फिर से राजनीति सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्ष का खेमा खासा उत्साहित है। एक सदस्य ने बताया कि उच्च न्यायालय के फैसले के बाद अब अध्यक्ष का पद रिक्त हो गया है, जल्द ही चुनाव होना तय है। इधर, अध्यक्ष खेमे में मायूसी है। इस खेमे के एक रणनीतिकार ने कहा कि हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी।

नवादा से अमन सिन्हा की रिपोर्ट

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