बिहार में ब्लैकआउट का खतरा, केंद्र से खपत की आधी ही मिल रही है बिजली

बिहार में ब्लैकआउट का खतरा, केंद्र से खपत की आधी ही मिल रही है बिजली

Desk. देश में कोयले की किल्लत के चलते बिजली का संकट गहराता जा रहा है. कोयला आधारित थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले का स्टॉक खत्म होता जा रहा है, जिससे इसका असर अब बिजली उत्पादन पर पड़ेगा, क्योंकि हमारे देश में बिजली का मुख्य स्रोत कोयला ही है. देश में 70 फीसदी बिजली का उत्पादन कोयला से ही होता है. बताया जा रहा है कि थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कोयला चार दिन का स्टॉक बचा है. वहीं कहीं-कहीं जगह कोयला का स्टॉक दो दिन का ही बचा है.

वहीं देशव्यापी कोयले संकट का असर बिहार की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर हो भी रहा है. खपत की तुलना में बिहार को केंद्रीय सेक्टर से लगभग आधी बिजली मिल रही है. खुले बाजार से बिहार अभी 1000 मेगावाट तक महंगी बिजली की खरीदारी कर रहा है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है. इस कारण राज्य के शहरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति तो लगभग ठीक है, लेकिन ग्रामीण इलाके में सात से 10 घंटे तक ही बिजली सप्लाई हो रही है.

बताया जा रहा है कि देश में इस वर्ष कोयला का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन अत्यधिक वर्षा के चलते बिजली उत्पादन इकाइयों तक कोयला की आपूर्ति नहीं हो पाई, जिससे यह संकट आया है. गुजरात, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बिजली उत्पादन पर इसका गहरा असर पड़ा है. वहीं देश के सभी राज्य बिजली संकट का समाना करना पड़ रहा है. 

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