पिछली सरकार में मंत्री रहे बिहार के इन 3 चेहरों को नये मोदी कैबिनेट में नहीं मिली जगह, क्या है इसकी वजह ?

पिछली सरकार में मंत्री रहे बिहार के इन 3 चेहरों को नये मोदी कैबिनेट में नहीं मिली जगह, क्या है इसकी वजह ?

PATNA : प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में आये एनडीए के नये मंत्रिमंडल का गठन बीते गुरुवार को हो गया। नरेन्द्र मोदी ने पीएम पद और उनके नवगठित मंत्रिमंडल में शामिल सदस्यों ने मंत्री पद का शपथ ग्रहण किया। 

नरेन्द्र मोदी की पहली सरकार में बिहार से शामिल कुछ बड़े नेताओं का इसबार पत्ता साफ हो गया है। इनमें कैबिनेट मंत्री रहे राधामोहन सिंह, राजीव प्रताप रूडी और राज्यमंत्री रहे रामकृपाल यादव को शामिल है। 

राधामोहन बिहार भाजपा के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी की सरकार में उन्हें कृषि मंत्री का बड़ा जिम्मा मिला था। पूर्वी चंपारण से छठी बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे राधामोहन सिंह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। राजपूत जाति से आने वाले राधामोहन सिंह को इसबार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।

ऐसा माना जा रहा है कि राधामोहन सिंह को ड्रॉप किए जाने के पीछे उनका परफॉर्मेंस एक बड़ी वजह हो सकती है। चर्चा है कि पिछली सरकार में कृषि मंत्रालय का प्रदर्शन उतना बेहतर नहीं रहा, जितना अन्य मंत्रालयों का. इस मसले पर मोदी -1 की सरकार हमेशा घिरती रही और विपक्ष ने किसानों की समस्याओं को मुद्दा बनाया।
 
 दरअसल कृषि मंत्रालय केंद्रीय कैबिनेट का महत्वपूर्ण प्रभाग है। जब राधामोहन सिंह मंत्री थे, तब इसके साथ ही पशुपालन और मत्स्य पालन भी जुड़ा हुआ था। राधामोहन सिंह के इस बार पीछे छूट जाने का कारण उनका पिछली सरकार में बेहर प्रदर्शन नहीं करना हो सकता है।

रामकृपाल यादव कभी बिहार की राजनीति में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के खासमखास थे। पटना लोकसभा क्षेत्र से राजद के टिकट पर ही वे संसद पहुंचे थे। पर 2014 के ऐन लोकसभा चुनाव के समय वे राजद छोड़कर भाजपा में आये और पाटलिपुत्र संसदीय सीट से लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती को हराकर लोकसभा पहुंचे। इसके साथ ही मोदी सरकार में राज्यमंत्री के रूप में शामिल किए गये। पर इसबार नरेन्द्र मोदी की दूसरी बार बन रही सरकार में उनका पत्ता साफ हो गया है। 

दरअसल यह माना जा रहा है कि रामकृपाल की जगह नित्यानंद राय को मिली है। रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को हराकर नित्यानंद राय ने अपना कद बड़ा किया है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भीएनडीए के दलों के साथ तालमेल और बेहतर प्रदर्शन का इनाम मंत्री पद के रूप में उन्हें मिला है। वहीं दोनों ही एक ही जाति से आते हैं ऐसे में किसी एक को ही जगह मिलनी थी और रामकृपाल पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय भारी पड़े हैं। 

इसी तरह उम्मीद थी कि सारण से जीते भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है पर ऐसा नहीं हुआ। 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार में रूडी को कौशल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। पर सरकार के विस्तार में वे मंत्रिमंडल से ड्राप हो गये। 

विवेकानंद की रिपोर्ट

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