भ्रष्टाचार में लिप्त मिला बिहार का यह सरकारी शिक्षक, छापेमारी में मिले निवेश के कई सबूत

भ्रष्टाचार में लिप्त मिला बिहार का यह सरकारी शिक्षक, छापेमारी में मिले निवेश के कई सबूत

GOPALGANJ : बिहार के सरकारी अधिकारियों और इंजीनियरों के भ्रष्टाचार में मालामाल होने की कई खबरे सामने आती है। अब बिहार के सरकारी शिक्षक भी धनकुबेर हो गए है। जिले के मांझा थाना क्षेत्र के नई बाजार में ऐसे ही एक शिक्षक के घर सदर एसडीओ डॉ प्रदीप कुमार ने छापेमारी की। इस दौरान शिक्षक के निजी आवास से बड़ी संख्या में खतियान, दस्तावेज व अन्य सरकारी कागजात बरामद हुए हैं। जिसे सदर एसडीओ ने जब्त कर कार्यवाई शुरू कर दी है।

एक साथ तीन बंगले में हुई थी छापेमारी

दरअसल, इस सन्दर्भ में बताया जाता है कि अंचल कार्यालय में लगटुहाता ग़ांव के नवसृजित विद्यालय के शिक्षक सन्तोष महतो के खिलाफ दलाली की शिकायत मिलने के बाद सदर एसडीओ  डॉ प्रदीप कुमार ,मांझा बीडीओ बिड़डू कुमार राम व सीओ शाहिद अख्तर के अलावे थानाध्यक्ष विशाल आनन्द के साथ मंगलवार की रात मांझा नई बाजार स्थित उनके मकान में छापेमारी की। एसडीओ ने एक के बाद एक कुल तीन आलीशान मकानों पर छापेमारी कर उसकी तलाशी लिया है। इस दौरान कई बंडल सरकारी जमीन के दस्तावेज ,बंदोबस्त पंजी,सीओ मांझा का मुहर ,सादा स्टाम्प ,भू लगान रसीद व लैपटॉप प्रिंटर,नगदी बरामद किया गया जिसके बाद मांझा सीओ शाहिद अख्तर ने मांझा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराया है। 

सदर एसडीओ ने छापेमारी में बरामद दस्तावेजो को सील कर दिया है। डीएम डॉ नवल किशोर चौधरी ने बताया कि मांझा अंचल में शिक्षक संतोष महतो के द्वारा जमीन संबंधित फर्जीवाड़े की सूचना मिल रही थी जिसके बाद सदर एसडीएम व डीसीएलआर को जांच का निर्देश दिया गया था। जांच के बाद छापेमारी कर शिक्षक के निजी आवास से जमीन के दस्तावेज रसीद,दाखिल खारिज संबंधित आवेदन,रजिस्टर 2 का कुछ भाग ,लैपटॉप,प्रिंटर बरामद किया गयाष 

 वही शिक्षक फरार था जिसके विरुद्ध मांझा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। साथ ही मांझा अंचल में पिछले 1 बर्ष में हुए दाखिल खारिज व रिजेक्शन  की जांच के लिए डीटीओ की अध्यक्षता में कमिटी बनाई गई है। जिसमे सदर एसडीएम, डीसीएलआर संयुक्त रूप से जांच कर 10 दिनों के अंदर जांच प्रतिवेदन देने को कहा गया है।

स्कूल की जगह अंचल कार्यालय में जमा रहता था डेरा

साथ ही जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध करवाई की जायेगी। बता दें कि शिक्षक होने के बाद भी ज्यादातर प्रतिनियोजन या स्कूल से गायब रहकर अंचल कार्यालय में ही रहता था। उसे लोग राजस्व कर्मचारी ही समझते थे। कई पंचायतो के राजस्व कर्मचारी का कार्य भी करता था।

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