तबादलों का अर्द्धशतक लगा चुका है यह आईएएस अधिकारी, 30 साल की नौकरी में 54वीं बार हुआ ट्रांसफर

तबादलों का अर्द्धशतक लगा चुका है यह आईएएस अधिकारी, 30 साल की नौकरी में 54वीं बार हुआ ट्रांसफर

DESK : हरियाणा के चर्चित वरिष्‍ठ आईएएस अफसर डा. अशोक खेमका एक बार अपने तबादले को लेकर चर्चा में आ गए हैं। अपने अनोखे कार्यशैली के लिए चर्चित यह आईएएस का एक और ट्रांसफर हो गया है। यह उनके 30 साल की नौकरी में 54वां तबादला बताया जा रहा है। अपने ट्वीट और कार्यशैली को लेकर अकसर चर्चाओं में रहने वाले आइएएस अफसर डा. अशोक खेमका को करीब दो साल बाद फिर से हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज के साथ लगाया गया है। 

जजपा कोटे के इकलौते राज्यमंत्री अनूप धानक के महकमे में अभिलेख, पुरातत्व एवं संग्रहालय के प्रधान सचिव का काम देख रहे खेमका अब फिर से विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के प्रधान सचिव होंगे। इसके अलावा उन्हें मत्स्य विभाग की भी जिम्मेदारी मिली है जो कैबिनेट मंत्री जेपी दलाल के पास है।

गौरतलब है कि खेमका से अनिल विज की पटरी खूब बैठती रही है। खेल विभाग के प्रधान सचिव रहते खेमका को खेल मंत्री के नाते अनिल विज ने उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में 10 में से 9.92 अंक दे दिए थे। साथ ही यह टिप्पणी भी की कि उन्होंने तीन साल में 20 से अधिक आइएएस अफसरों के साथ काम किया, लेकिन कोई भी अधिकारी उनके करीब नहीं था। जिस पर खूब विवाद भी हुआ था। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री ने खेमका के अंक घटाते हुए प्रतिकूल टिप्पणी की थी जिसका विवाद हाई कोर्ट तक पहुंचा।

तबादलों के लिए मुख्यमंत्रियों के फेवरेट रहे हैं खेमका

अशोक खेमका के काम को लेकर हरियाणा में जो भी सीएम बना, वह बेहद सावधान रहा। बंसीलालके नेतृत्व वाली हरियाणा विकास पार्टी की सरकार के दौरान डॉ. खेमका का कई बार तबादले हुए। ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली इनलो की सरकार के दौरान डॉ॰ खेमका का पांच साल में नौ बार तबादला हुआ भूपेंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार के दौरान डॉ॰ खेमका का कई बार तबादले हुए। हर बार खेमका ने अपने तबादले को ले कर मिडिया में सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की। मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार के दौरान डॉ. खेमका का कई बार तबादले हुए यह तबादला भाजपा सरकार के शाशन काल में 6 या 7 बार हो रहा है। अब की बार इन्हें इनके सबसे बड़े हितेषी अनिल विज के विभाग में किया गया है।

रॉबर्ट वाड्रा के जमीन घोटाले को लेकर रहे चर्चा में

हालांकि खेमका के काम करने का तरीका सबसे अलग रहा है, जो कि सरकार को पसंद नहीं आया। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई, जब उन्होंने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए जमीन के समझौते पर सवाल उठाए। इस घोटाले के सामने आने के बाद मौजूदा मनमोहन सरकार को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

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