इसे बोलते हैं पुलिस का सरंक्षण! जिस अपराधी को पुलिस बता रही है फरार, वह हर दिन थाने में रहता है मौजूद, फिर भी नहीं किया गिरफ्तार

इसे बोलते हैं पुलिस का सरंक्षण! जिस अपराधी को पुलिस बता रही है फरार, वह हर दिन थाने में रहता है मौजूद, फिर भी नहीं किया गिरफ्तार

SUPAUL : अपराध पर काबू पाने की बजाय पुलिस अब अपराधियो के संरक्षण में लग गई है। ऐसा इसलिए कि त्रिवेणीगंज कांड संख्या 147/2022 में नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी तीन महीने बाद भी नही हो सकी बल्कि नामजद खुलेआम थाने में हाजिरी लगा रहा है। लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। जिसको लेकर पुलिस के काम पर सवाल उठने लगे हैं।

तीन माह पहले हत्या की कोशिश के मामले में दर्ज हुआ था केस

जमीन से जुड़े मामले में तीन माह पूर्व थाना क्षेत्र के मटकुरिया गांव में हिंसक वारदात को अंजाम देते हुए फरसा से वार कर एक मो. इलियास पर जानलेवा हमला कर उसे जान मारने का प्रयास किया गया इस दौरान फरसे से घायल हुये व्यक्ति को अस्पताल ले जाया जाता है जहां डॉक्टरों के अथक प्रयास से उसकी जान बच जाती है लेकिन जख्म गहरा होने से आज भी जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। 

महज 9 धुर जमीन के झगड़े में घटना को अंजाम दे रहे लोगो द्वारा घटनास्थल पर फायरिंग की गई इसके बावजूद जिन लोगो पर प्राथमिकी दर्ज की गई उनमे से एक भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नही हो सकी। मामले में जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया आज भी बेरोकटोक घूम रहे है। सबसे मजेदार बात यह कि नामजद व्यक्ति की थाने में मौजूदगी पुलिस के चरित्र की पोल खोलने के लिए काफी है। 

न्याय के लिए दर दर घूमते पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस से मिलीभगत कर नामजद अभियुक्त अभी भी उनको व परिवार के लोगो को डरा धमका रहे है ऐसे में कोई भी बड़ी घटना किसी वक्त घट सकती है, पीड़ित परिवार के लोगो ने पुलिस पर अपराधियों के संरक्षण का आरोप लगाते हुए एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। साथ ही यह भी मांग की है अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी की जाये और केस में अपराधियों को संरक्षण दे रहे पुलिसकर्मियों के बिरुद्ध भी करवाई की जाए।

गौरतलब है. कि कांड संख्या 147 में भादवि की धारा 147,148,149,447,427,321,323,324,307 व 379 का प्रयोग किया गया है।सबसे रोचक पहलू यह कि भारतीय दंड संहिता की धारा 307 में नामित अभियुक्त मृत्युदंड का भागी होता है धारा 307 गैर जमानतीय है लेकिन पुलिस की कार्यशैली ने भारतिय दंड संहिता व अनुपालन के लिए जो व्यवस्था रखी गई उसका मख़ौल उड़ाया जा रहा है। सभी परिवार में पुलिस के प्रति अविश्वास पैदा हो रहा हैं और पीडि़त परिवार न्याय के लिए ना उम्मीद हो रहे हैं। 

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि फरियादी को न्याय नहीं मिला तो कहीं ना कहीं थाने में बैठे पुलिस वाले की दहशत से और पुलिस की दोहरी रवैया के चलते आत्महत्या करने को मजबूर हो सकते ऐसा आम जनताओं में चर्चा का विषय बना हुआ है

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