यह है सबसे बड़ी वजह, जिससे पाक आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर हुआ मजबूर

यह है सबसे बड़ी वजह, जिससे पाक आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर हुआ मजबूर

NEWS4NATION DESK : भारत के साथ तनाव के बीच पहली बार पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पाक ने कई आतंकवादी संगठनों पर बैन लगाने के साथ-साथ कई आतंकियों को गिरफ्तार किया है। दरअसल पाकिस्तान की इस कार्रवाई की सबसे बड़ी वजह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स से मिली कड़ी चेतावनी है। भारत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स से उसकी सिफारिशों को लागू करने की कड़ी चेतावनी के बाद पाकिस्तान में डर कायम हुआ है और  इसी डर की वजह से पाकिस्तान आतंकियों पर कार्रवाई के लिए मजबूर हुआ है। 

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के वित्त सचिव आरिफ अहमद खान ने सरकार से कहा है कि अगर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया तो पाकिस्तान को कई तरह के आर्थिक प्रतिबंधों से गुजरना होगा।  

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक उन्होंने कहा कि एफएटीएफ की सिफारिशों के आधार पर पाकिस्तान को आगे कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने इस बात की आशंका जाहिर की कि यदि एफएटीएफ की सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया और लागू नहीं किया गया तो वह आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर सकता है।

बता दें कि है कि एफएटीएफ दुनिया में आतंकवादी फंडिंग पर नजर रखने वाली एक संस्था है जिसका मुख्यालय पेरिस में हैं। भारत यह चाहता है कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की ब्लैकलिस्ट में रखा जाए। अगर भारत ऐसा करने में कामयाब हो जाता है तो पहले से ही बदहाल पाकिस्तान पर तगड़ी आर्थ‍िक चोट पड़ेगी। 

एफएटीएफ के इंटरनेशनल कोऑपरेशन रीव्यू ग्रुप (ICRG) ने हाल की एक बैठक में आतंकियों पर पाक के एक्शन प्लान की समीक्षा की है। बताया जा रहा है कि समूह जनवरी 2019 तक तय डेडलाइन में पाकिस्तान के कार्य से संतुष्ट नहीं हुआ। 

एफएटीएफ ने पाकिस्तान से कहा है कि वह, 'सहजता से अपने एक्शन प्लान को पूरा करे, खासकर जिनका टाइमलाइन मई 2019 तक है।' FATF जून 2019 में पाकिस्तान की प्रगति की अगली समीक्षा करेगा।

पाकिस्तान इस एक्शन प्लान को कितनी सफलता से लागू करता है इसके फिजिकल वैरिफिकेशन के द्वारा एफएटीएफ सितंबर तक यह निर्णय लेगा कि पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' से बाहर करना है या 'ब्लैक लिस्ट' में रखना है।

एफएटीएफ ने पाकिस्तान के लिए 10 बिंदुओं वाला टारगेट सेट कर रखा है। पाकिस्तान को इन टारगेट को पूरा करने के लिए मई 2019 तक का टाइम दिया गया है। पुलवामा हमले के बाद भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भारी दबाव की वजह से एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में बरकरार रखा है। 

मई 2019 तक पाकिस्तान को इन 10 बातों को दिखाना होगा, वर्ना कर दिया जायेगा ब्लैकलिस्टेड 

1. आतंकवाद के फंडिंग के जोखिम को समुचित तरीके से पहचाना गया है, उसका आकलन किया गया है और जोखिम-संवेदनशीलता के आधार पर उनका निरीक्षण किया गया है।

2. एंटी मनी लॉड्रिंग ऐंड काउंटरिंग फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म एक्ट 2009 का उल्लंघन के मामलों में उपचरात्मक कार्रवाई और प्रतिबंध लागू किए गए हैं और इन कार्यों का वित्तीय संस्थाओं के द्वारा AML/CFT के अनुपालन पर कोई असर पड़ा है।

3. अवैध धन या वैल्यू ट्रांसफर सर्विस की पहचान और प्रवर्तन कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी सहयोग कर रहे हैं और एक्शन ले रहे हैं।

4. करेंसी की अवैध आवाजाही और कैश कोरियर्स की पहचान सुनिश्चित।

5. आतंकी वित्तपोषण से निपटने के मामले में प्रांतीय और संघीय अथॉरिटीज के बीच इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन सुनिश्चित।

6. कानून प्रवर्तन एजेंसियां टेरर फाइनेंसिंग की गतिविधियों को पकड़ रही हैं।

7. टेरर फाइनेंसिंग मुकदमों के द्वारा टेरर फाइनेंसिंग पर रोक लग सके।

8. ऐसी संपत्तियों की पहचान और जब्ती जो टेरर फंडिंग को बढ़ावा देते हों।

9. जो भी इन प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें आपराधिक मुकदमों के द्वारा दंड मिले।

10. फंडिंग से चल रहे आतंकियों के अड्डों या संस्थानों को उनके संसाधनों से वंचित करें।

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