अचानक आये इस त्रासदी ने मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार की रीढ़ तोड़ कर रख दिया, जिम्मेदार कौन?

अचानक आये इस त्रासदी ने मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार की रीढ़ तोड़ कर रख दिया, जिम्मेदार कौन?

NEWS4NATION DESK : संयुक्त राष्ट्र संघ मे आयोजित उच्च स्तरीय बैठक जिसमें यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज पर चर्चा के उपरांत अमेरिका में ही पटना में हुई अप्रत्याशित वर्षा एवं उसके कारण हुई अप्रत्याशित हानि की खबर मिली जो व्यथित करने वाली थी। आज जब मैं पटना पहुंचा तो सीधे एक दैनिक हिन्दी अखबार एवं एनडीआरएफ के सहयोग से चिकित्सीय कैंप एवं दवा वितरण में भाग लेने का मौका लगा। 

इस दौरान जब राजेंद्र नगर के विभिन्न इलाकों जिसमें घर का प्रथम तल्ला डूब चुका था, उसमें हुए त्रासदी को देखकर यही प्रतीत हुआ कि मध्यमवर्गीय एवं निम्न वर्गीय परिवारों की इस जलजमाव ने रीड तोड़ दी है। मेहनत के पैसों से कमाए गए फ्रिज, गाड़ी, स्कूटर, यूपीएस, कंप्यूटर, सोफा कुर्सियां ,गद्दे पलंग, रसोई की सामान  सारी चीजें नष्ट हो चुकी है जिसकी भरपाई मध्यम या निम्न वर्गीय व्यक्तियों के लिए प्रैक्टिकली नामुमकिन सा लगता है। 

जल विभीषिका को देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता है या इस पर अवश्य प्रश्नचिन्ह लगता है कि क्या मात्र वर्षा के पानी से इतना ज्यादा जलजमाव हो सकता है या इसके पीछे हमारे सम्प हाउस या ड्रेनेज  सिस्टम की फैलियर ज्यादा उत्तरदाई है। जिस तरह की पानी की विभीषिका राजेंद्र नगर में दिखी है ऐसी स्थिति में यह मानना मुश्किल है यह केवल प्राकृतिक आपदा है। 

यह प्राकृतिक आपदा से कहीं ज्यादा प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत देता है। पटना में विगत 10 वर्षों से अरबों रुपए की खपत से जो ड्रेनेज सिस्टम के कार्य चल रहे थे उस पर भी प्रश्नचिन्ह उठना लाजिमी है। सरकार को जनता को जवाब देना ही चाहिए कि इस तरह की त्रासदी में हमारे ड्रेनेज सिस्टम की विफलता कितने हद तक कसूरवार हैं। 

हमारे घर में कमर भर पानी रहने के बाद कुछ अंदाज इन विपत्तियों का तो हमें हुआ है, लेकिन राजेंद्र नगर में या उस तरह के पटना के विभिन्न स्थानों पर रहने वाले वृद्धों, एकल परिवारों, मां महिलाएं पुरुष बच्चे बच्चियों को बिजली के अभाव में, पानी के अभाव में, रसोई के अभाव में, दवाओं के अभाव में,  कितनी त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है यह शायद हमारे सोच से भी ज्यादा दिल दहलाने वाला है। 

आज जब एनडीआरएफ की टीम और दैनिक भास्कर की टीम के साथ जब हम दवाओं के वितरण के लिए हम निकले तो वृद्ध माताओं, लाचार परिवारों, बीमार लोगों की त्रासदी को देख कर के आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। ऐसी स्थिति में सरकार के साथ-साथ सारे स्वयंसेवी संस्थाओं एवं व्यक्तियों को एक दूसरे की सहायता के लिए आगे आने की आवश्यकता है। 

अभी जलजमाव के कारण जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हमारे सामने चुनौती देने वाली है उनमें डायरिया डिसेंट्री उल्टी बुखार स्किन का इन्फेक्शन,  सांप का विश,  मच्छरों का डंक एवं उससे उत्पन्न होने वाली बीमारियां यह सभी चुनौतियां हमारे सामने है। समय रहते यदि इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह अलग महामारी के रूप में हमारे लोगों को और परेशान करने वाली  है। जितनी ज्यादा जलजमाव हुई है उससे तो यही प्रतीत होता है किया प्राकृतिक विपदा से कहीं अधिक हमारे ड्रेनेज सिस्टम का पुर्णतः फेलियोर है। 

आइए हम सभी अपने अपने स्तर से जितने लोगों की भी सहायता कर सकते हैं उनकी सहायता करें और इस आपदा में अपनी सकारात्मक सहभागिता निभाएं जिससे लोगों के जान माल की हानि कम से कम हो !


डॉ. दिवाकर तेजस्वी

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